मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उत्तर प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित विभिन्न सड़क परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर, सतत और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और आमजन की सुविधा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यह अनिवार्य है कि सभी कार्य उच्च गुणवत्ता, पूर्ण पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क कनेक्टिविटी से उत्तर प्रदेश में निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता है, किंतु यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार की नीति है कि किसी भी परियोजना में अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्षों की कटान की जाए और जितने वृक्ष काटे जाएं, उससे अधिक संख्या में पौधरोपण अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी एनएचएआई से संबंधित परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा करें। यदि किसी स्तर पर कोई विषय लंबित हो, तो उसे मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मुख्य सचिव द्वारा एनएचएआई परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा की जाए, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकें।
भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी सीधे किसानों से संवाद स्थापित करें। किसी भी स्थिति में बिचौलियों को हस्तक्षेप का अवसर न दिया जाए। इससे किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे और परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेंगी।