बिजनौर। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से शनिवार को बिजनौर कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने की। इस दौरान आयोग के सदस्य, जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी), जिला पंचायत प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जनसुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने आयोग के गठन, उद्देश्य, कार्यक्षेत्र और दायित्वों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयोग का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक आरक्षण से जुड़े तथ्यों का अध्ययन करना है। उन्होंने कहा कि आयोग जनसुझावों और आपत्तियों का परीक्षण कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को अपनी संस्तुतियां भेजेगा।

बैठक में प्रशासक जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने बिजनौर जनपद के वर्ष 2026 के सांख्यिकीय आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जिले की कुल जनसंख्या 36,82,713 है, जिसमें 27,89,589 लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। जिले में 5 तहसील, 11 विकास खंड, 1,123 ग्राम प्रधान, 56 जिला पंचायत सदस्य, 1,393 क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा 11,223 ग्राम पंचायत सदस्य स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं।
आयोग के सदस्यों ने कहा कि नगरीय एवं ग्रामीण निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक आरक्षण की वर्तमान स्थिति और पिछड़े वर्गों की वास्तविक सामाजिक स्थिति का आकलन आवश्यक है। इस उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से जानकारी एकत्र की गई तथा स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के प्रतिशत और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
जनसुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष ने जिला पंचायत सदस्यों से ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक समस्याओं, विकास संबंधी चुनौतियों और जनहित के मुद्दों पर सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा, ताकि स्थानीय निकायों में राजनीतिक आरक्षण से जुड़ी व्यवस्था अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनाई जा सके।