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ग्रेटर नोएडा में UP RERA ट्रिब्यूनल की बड़ी कार्रवाई: 100 करोड़ की वसूली की जांच, 45 दिन में खरीदारों को पैसे लौटाने का आदेश

ट्रिब्यूनल ने कहा है कि परियोजना के प्रमोटर ने शुरू से ही भ्रामक, अनैतिक और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके अपनाए, जिससे खरीदारों को वित्तीय और कानूनी नुकसान हुआ।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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ग्रेटर नोएडा में UP RERA ट्रिब्यूनल की बड़ी कार्रवाई: 100 करोड़ की वसूली की जांच, 45 दिन में खरीदारों को पैसे लौटाने का आदेश

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (UP RERA Tribunal) ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-27 स्थित एक बड़े आवासीय परियोजना से जुड़े प्रमोटर के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

ट्रिब्यूनल ने कहा है कि परियोजना के प्रमोटर ने शुरू से ही भ्रामक, अनैतिक और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके अपनाए, जिससे खरीदारों को वित्तीय और कानूनी नुकसान हुआ। इसी आधार पर न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया है कि प्रमोटर 45 दिनों के भीतर खरीदारों को देरी से कब्जा देने पर ब्याज का भुगतान करे और मास्टर क्लब व गोल्फ कोर्स फीस के नाम पर वसूली गई धनराशि वापस करे।

त्रिपक्षीय सब-लीज डीड में खामियों पर ट्रिब्यूनल सख्त

न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और प्रशासनिक सदस्य रामेश्वर सिंह की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रमोटर को पंजीकृत त्रिपक्षीय सब-लीज डीड में छूटी हुई और गलत जानकारी को सुधारने के लिए करेक्शन डीड कराना होगा। दस्तावेजों में प्लॉट का आकार, एक्सक्लूसिव एरिया, सीमा विवरण और अविभाजित हिस्सेदारी जैसी मूलभूत जानकारियों का न होना गंभीर त्रुटि माना गया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट कहा कि ये कमियां अलग-अलग चूक नहीं, बल्कि धोखे और अनियमितताओं की एक सुनियोजित श्रृंखला का हिस्सा प्रतीत होती हैं।

UP RERA के आदेश को चुनौती देने वाली अपील खारिज

मामले में एआर लैंडक्राफ्ट LLP-जो 100 एकड़ की गोडरेज गोल्फ लिंक टाउनशिप के भीतर विकसित गोडरेज क्रेस्ट रेजिडेंशियल क्लस्टर की प्रमोटर है- ने UP RERA के 7 मार्च 2024 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। कंपनी ने कहा था कि रेरा का आदेश त्रुटिपूर्ण है, परंतु ट्रिब्यूनल ने कंपनी की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि रेरा का आदेश खरीदारों के हित में था और प्रमोटर की ओर से कोई ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया।

100 करोड़ की वसूली की जांच के निर्देश

न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि प्रमोटर ने क्लब एवं गोल्फ कोर्स जैसी सुविधाओं के नाम पर खरीदारों से बड़े पैमाने पर धनराशि वसूली। यह राशि लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आदेश में उल्लेख है कि ये शुल्क मूल रूप से वैकल्पिक थे, लेकिन इन्हें बाध्यकारी बताकर खरीदारों को गुमराह किया गया और कब्जा प्रक्रिया को रोकने के लिए उपयोग किया गया।

इसी के मद्देनजर राज्य सरकार को जांच के आदेश दिए गए हैं कि क्या GNIDA ने अपनी आरईपी (Recreational Entertainment Park) योजना और भवन नियमों का उल्लंघन कर प्रमोटर को अनुचित लाभ पहुंचाया।

GNIDA की स्वीकृतियों पर भी उठे सवाल

ट्रिब्यूनल ने गाजियाबाद औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) द्वारा दी गई अनुमतियों और नियामक स्वीकृतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायाधिकरण ने UP RERA से कहा है कि वह आरईपी योजना से संबंधित सभी दस्तावेज, स्वीकृत लेआउट और सब-लीज रिकॉर्ड प्रस्तुत करे, ताकि यह आकलन किया जा सके कि क्या पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई या नहीं।

न्यायाधिकरण ने प्रमुख सचिव को यह जांचने का निर्देश भी दिया है कि क्या GNIDA ने भवन नियमों और आरईपी मानकों का उल्लंघन कर प्रमोटर को किसी प्रकार का फायदा पहुंचाया।

खरीदारों को गुमराह करने का आरोप साबित

आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है कि खरीदारों को संपत्ति की प्रकृति, स्वामित्व हस्तांतरण प्रक्रिया, क्लब और गोल्फ कोर्स से संबंधित शुल्क और दायित्वों को लेकर गुमराह किया गया। प्रमोटर ने इन शुल्कों को आवश्यक बताकर दबाव बनाया और इन्हें न भरने पर कब्जा रोकने की रणनीति अपनाई। ट्रिब्यूनल ने ऐसे व्यवहार को रेरा अधिनियम के तहत गंभीर उल्लंघन माना है।

प्रमोटर की प्रतिक्रिया-आदेश से आश्चर्यचकित

गोडरेज समूह के प्रवक्ता ने कहा कि वे न्यायाधिकरण के निष्कर्षों और निर्देशों से आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी आदेश का विस्तृत अध्ययन कर रही है और आवश्यकता होने पर इसे उचित न्यायालय में चुनौती देगी। कंपनी का कहना है कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेगी।

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