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UP Panchayat Elections 2026: पंचायत चुनाव के साथ होंगे दूसरे चुनाव भी? जानिए क्यों लग रहीं अटकलें

2026 में प्रस्तावित हैं पंचायत चुनाव, लेकिन देरी की आशंका...?

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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UP Panchayat Elections 2026: पंचायत चुनाव के साथ होंगे दूसरे चुनाव भी? जानिए क्यों लग रहीं अटकलें

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इनके समय पर होने को लेकर संशय जताया जा रहा है। जानकारों के अनुसार, यह चुनाव अप्रैल-मई 2026 में संभावित हैं, हालांकि इनमें देरी भी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि 2021 के पंचायत चुनाव भी कोरोना महामारी के कारण लगभग एक वर्ष की देरी से संपन्न हुए थे।

आरक्षण प्रक्रिया बनी देरी की बड़ी वजह

हर पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाता है। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और जिला पंचायत में आरक्षण तय होता है। इस प्रक्रिया में पहले अनंतिम आरक्षण सूची जारी होती है, जिस पर आपत्तियां मांगी जाती हैं। इसके बाद आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया लगभग 3 से 5 महीने का समय लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग का गठन मार्च 2026 में भी होता है, तब भी पूरी प्रक्रिया जुलाई 2026 तक पूरी होगी और चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2026 तक खिसक सकते हैं।

विधानसभा चुनाव 2027 से टकराव की आशंका

यदि पंचायत चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2026 में होते हैं, तो यह जनवरी-फरवरी 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से बेहद करीब होंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों को विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। पंचायत चुनावों को अक्सर “सत्ता का सेमीफाइनल” माना जाता है। इन चुनावों में दलों की अंदरूनी कलह और जमीनी ताकत खुलकर सामने आती है। ऐसे में पंचायत चुनाव के तुरंत बाद विधानसभा चुनाव में उतरना राजनीतिक दलों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

क्या 2027 के बाद होंगे पंचायत चुनाव?

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएं। सूत्रों के अनुसार, पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ, लेकिन अलग-अलग चरणों में कराए जा सकते हैं। इस स्थिति में गांवों में प्रधान, जबकि शहरों में चेयरमैन और मेयर का चुनाव एक ही समयावधि में हो सकता है। माना जा रहा है कि यह प्रयोग “वन नेशन, वन इलेक्शन” की दिशा में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक लिटमस टेस्ट भी साबित हो सकता है।

समय पर चुनाव न हुए तो प्रशासनिक व्यवस्था

फिलहाल न तो राजनीतिक दल और न ही प्रशासन इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने को तैयार हैं। लेकिन यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं होते, तो ग्राम पंचायतों की कमान सेक्रेटरी और जिला पंचायतों की जिम्मेदारी जिलाधिकारी (प्रशासक) के हाथों में रहेगी, जब तक अगला चुनाव नहीं हो जाता।

UP Panchayat Elections 2026 को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। चुनाव समय पर होंगे, विधानसभा चुनाव से पहले, या बाद में-यह आने वाले महीनों में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा। इतना तय है कि पंचायत चुनावों का समय निर्धारण 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर गहरा असर डालने वाला है।

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