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यमुना में बिना ट्रीट किया सीवर: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश

यमुना में गिरने वाले दूषित पानी को लेकर नोएडा अथॉरिटी और CPCB के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट में दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शहर में उपलब्ध सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता जरूरत से अधिक है और 100 प्रतिशत सीवेज को ट्रीट किया जा रहा है।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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यमुना में बिना ट्रीट किया सीवर: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश

यमुना नदी में बिना शोधन (ट्रीटमेंट) किए सीवर का पानी छोड़े जाने के गंभीर मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट पर आज सुनवाई होनी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नोएडा क्षेत्र से निकलने वाला अधूरा या बिना ट्रीट किया गया गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है, जिससे नदी का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

नोएडा अथॉरिटी बनाम CPCB: अलग-अलग दावे

यमुना में गिरने वाले दूषित पानी को लेकर नोएडा अथॉरिटी और CPCB के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट में दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शहर में उपलब्ध सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता जरूरत से अधिक है और 100 प्रतिशत सीवेज को ट्रीट किया जा रहा है। वहीं CPCB की रिपोर्ट बताती है कि कई STP तय प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं और इसी कारण बिना शोधन किया गया पानी नदी तक पहुंच रहा है।

STP की हकीकत: 8 में से सिर्फ 3 ही मानकों पर खरे

CPCB के अनुसार दिसंबर 2025 में नोएडा के 8 STP और 3 इन-सीटू वेटलैंड से सैंपल लिए गए थे। जांच में सामने आया कि 8 में से केवल 3 STP ही सभी मानकों पर खरे उतरे। खासतौर पर बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) जैसे अहम पैमाने पर अधिकांश STP फेल पाए गए। अधिक बीओडी का मतलब है पानी में ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण का उच्च स्तर, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर गंभीर खतरा पैदा होता है। यमुना में मिलने से ठीक पहले नोएडा ड्रेन के पानी में बीओडी का स्तर बेहद ज्यादा पाया गया, जो बिना ट्रीटमेंट गंदे पानी की पुष्टि करता है।

ड्रेनों की स्थिति और जियो-टैगिंग

नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट को बताया कि शहर की कुल 30 ड्रेनों में से 6 फिलहाल सूखी हैं और 24 ड्रेनों की जियो-टैगिंग की जा चुकी है। कई ड्रेनों को STP या इन-सीटू वेटलैंड से जोड़ा गया है। अथॉरिटी का दावा है कि नोएडा में कुल 411 एमएलडी STP क्षमता उपलब्ध है, जबकि केवल 240 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। ट्रीट किया गया पानी उद्योगों को बेचा जा रहा है और ड्रेनों को ट्रैप करने के लिए चरणबद्ध योजना पर काम जारी है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हालात सबसे खराब

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में STP का संचालन नहीं हो रहा है। इन सोसायटियों से निकलने वाला गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट सीधे नालों में बहाया जा रहा है, जो आगे चलकर हिंडन नदी में मिल रहा है। विक्ट्री वन सेंट्रल और एम्स ग्रीन एवेन्यू जैसी सोसायटियों में सैकड़ों परिवार अधूरी सुविधाओं के बीच रहने को मजबूर हैं। निवासियों का कहना है कि STP की मशीनें तो लगी हैं, लेकिन वे चालू नहीं हैं, जिससे बेसमेंट और आसपास के इलाके में गंदा पानी जमा रहता है।

हिंडन नदी की हालत चिंताजनक

हिंडन नदी का पानी अब न तो नहाने लायक रहा है और न ही पीने योग्य। जांच के अनुसार इसमें फीकल कोलिफॉर्म का स्तर 3.30 लाख MPN प्रति 100 एमएल तक पहुंच गया है, जबकि नदियों के लिए यह सीमा 500 और पीने के पानी के लिए 50 MPN होनी चाहिए। इस गंभीर स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में भी अलग से सुनवाई होनी है। CPCB की रिपोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन की पोल खोल दी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि यमुना और हिंडन जैसी नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होती है और सुधार के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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