प्रयागराज महाकुंभ : मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार एक्शन मोड पर नजर आ रहे हैं, सीएम योगी ने शनिवार को प्रयागराज पहुंचे। सबसे पहले वह संगम तट पर वहां पहुंचे, जहां भगदड़ हुई थी
प्रयागराज महाकुंभ : मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार एक्शन मोड पर नजर आ रहे हैं, सीएम योगी ने शनिवार को प्रयागराज पहुंचे। सबसे पहले वह संगम तट पर वहां पहुंचे, जहां भगदड़ हुई थी
महाकुंभ 2025 में स्वच्छता और व्यवस्था का खास ध्यान रखा गया है। 13 से 31 जनवरी के बीच संगम में 31.46 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, जो दिल्ली की कुल आबादी से नौ गुना ज्यादा है।
गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद प्रामाणिकता और परंपरा पर आधारित होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित।
प्रयागराज में किसानों के सम्मान में स्थापित हुआ अनूठा आस्था केंद्र, चार बार होती है भव्य आरती...
महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की सुगम वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने प्रयागराज कमिश्नरेट में वाहनों के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी है। जिला मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार मांदड़ ने जानकारी दी कि अब वाहन प्रवेश को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, हालांकि मेला क्षेत्र में यातायात संबंधी नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
महाकुंभ 2025 में बसंत पंचमी (3 फरवरी) के तीसरे अमृत स्नान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष रणनीति बनाई है।
महाकुंभ 2025 में वैष्णव परंपरा के साधुओं द्वारा कठिनतम खप्पर तपस्या की जाएगी। इस बार करीब 350 तपस्वी धूनी साधना में लीन होंगे। यह साधना अखाड़ों में साधुओं की वरिष्ठता निर्धारित करने का प्रमुख आधार मानी जाती है।
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 का आज 17वां दिन (29 जनवरी) है। इस पावन अवसर पर मौनी अमावस्या के दिन दूसरा अमृत स्नान जारी है। संगम तट पर नागा साधु और संतगण परंपरागत ढंग से स्नान कर रहे हैं।
महाकुंभ 2025 में उमड़ी आस्था की लहर न केवल प्रयागराज बल्कि आसपास के तीर्थ स्थलों काशी और अयोध्या पर भी भारी दबाव बना रही है।
महाकुंभ का आयोजन न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह जीवन, मृत्यु और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों को जानने और समझने का भी एक माध्यम है। महाकुंभ के दौरान नागा साधुओं की उपस्थिति और उनकी जीवन शैली लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।
तीरथराज प्रयाग का महाकुंभ जन मन का महापर्व बन चुका है। अपवाद छोड़ दें तो हर कोई एक-दूसरे का हर संभव सहयोग कर रहा है। बिना पूछे भी। प्रशासन की तो खैर हर जगह प्रभावी उपस्थित है ही। हमारे सनातन धर्म का हर आयोजन, जन मन का आयोजन बने।
महाकुंभ के दौरान आयोजित परमधर्म संसद में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्म न्यायालय के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों के समाधान के लिए एक अलग न्यायालय की जरूरत है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में विशेषज्ञता और संवेदनशीलता लाई जा सके।
महाकुंभ 2025 के दौरान 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाएंगे। उनके इस कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। इसी दिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी महाकुंभ में स्नान करेंगे। उनके साथ कांग्रेस के कई अन्य नेता और पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
महाकुंभ 2025 के विशेष स्नान पर्व मौनी अमावस्या के अवसर पर विंध्यधाम में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। यह पर्व 29 जनवरी को है, और इस दिन पांच से छह लाख श्रद्धालुओं के विंध्यवासिनी धाम में दर्शन करने की संभावना है।
महाकुंभ मेले में शुक्रवार से बाहरी गाड़ियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय गणतंत्र दिवस के चलते शनिवार और रविवार को होने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।