फर्रुखाबाद में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 52 बाढ़ चौकियां, 24 शरणालय, 191 नावें और 53 गोताखोरों की तैनाती की तैयारी की है। मानसून से पहले मेगा मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई।
फर्रुखाबाद में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 52 बाढ़ चौकियां, 24 शरणालय, 191 नावें और 53 गोताखोरों की तैनाती की तैयारी की है। मानसून से पहले मेगा मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई।
Bijnor : बिजनौर में गंगा के तटबंध में कटान के कारण स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे दिल्ली-पौड़ी हाईवे बंद कर दिया गया है।एक दर्जन से अधिक गांव और हजारों हेक्टेयर फसल खतरे में हैं, ग्रामीण अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।सिंचाई विभाग, प्रशासन और मजदूर लगातार बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन तटबंध अभी तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाया है।
गाजीपुर जिले के भांवरकोल ब्लॉक के कोटवा, लट्टूडीह मार्ग पर बाढ़ के कारण ग्रामीणों को बेहद कठिन हालात में सफर करना पड़ रहा है।
Ballia: बलिया में गंगा नदी खतरे के निशान 57.61 मीटर को पार कर 58.21 मीटर तक पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ विभाग अलर्ट हो गया है। बैरिया तहसील के गंगापुर गांव से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरवाई जा रही है। ये बोरियां तटबंध की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए
Ghazipur : गाजीपुर में गंगा का जलस्तर 15 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़कर 53.094 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से 10 मीटर नीचे है। प्रशासन ने 35 राहत केंद्र और 44 आश्रय स्थल तैयार कर बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। एडीएम दिनेश कुमार ने लोगों से अफवाहों से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हुए भारी बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिसके चलते गंगा किनारे बसे खेतों में गंगा का पानी भर गया है। वहीं खेतों में गंगा का पानी पहुंचने से खेती के कार्य भी प्रभावित हुए हैं। जिससे किसानों के सामने पशु चारे से लेकर जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गई है।
गंगा नदी का विकराल रूप दिन-प्रतिदिन और विकराल होता जा रहा है। गंगा नदी में गर्रा के साथ ही रामगंगा से भारी मात्रा में छोड़े जा रहे पानी ने गंगा के जलस्तर को खतरे के निशान ने आगे बढ़ा दिया है। बुधवार को कटरी के चंपापुरवा और चैनपुरवा में बाढ़ का पानी आतंक मचा रहा है। सड़के तालाब बन चुकी हैं। वहीं खतरे को देखते हुए आस-पास के गांवों के
उत्तर प्रदेश में बाढ़ से 39216 लोग प्रभावित हुए हैं। नदियों के ऊफान से इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जीवन पर असर पड़ा है। वहीं, 8062 लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है।