ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात की व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे स्नान पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।
