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नोएडा हादसा: इंजीनियर की मौत पर बड़ा एक्शन, CEO लोकेश एम हटाए गए

नोएडा सेक्टर-150 हादसे में इंजीनियर की मौत के बाद योगी सरकार का बड़ा कदम। नोएडा अथॉरिटी के CEO डॉ. लोकेश एम हटाए गए, SIT जांच जारी।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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नोएडा हादसा: इंजीनियर की मौत पर बड़ा एक्शन, CEO लोकेश एम हटाए गए

नोएडा सेक्टर-150 में गहरे गड्ढे में कार डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई है, जब एक दिन पहले ही लोगों ने घटना के विरोध में मार्च निकालकर प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आक्रोश जताया था।

मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद सीधा एक्शन

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से संज्ञान में लिया। शुरुआती जांच में यह मामला नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही से जुड़ा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया गया है। यह SIT पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी।

मेरठ जोन ADG की अध्यक्षता में गठित हुई SIT

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, गठित SIT की अध्यक्षता मेरठ जोन के ADG करेंगे। टीम में संभागीय आयुक्त, मेरठ लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। SIT जांच में यह देखा जाएगा कि सड़क सुरक्षा, निर्माण स्थल की बैरिकेडिंग और ड्रेनेज व्यवस्था में कहां-कहां लापरवाही हुई।

पहले जूनियर इंजीनियर पर गिरी थी गाज

मामला तूल पकड़ने के बाद नोएडा अथॉरिटी ने रविवार को प्रारंभिक कार्रवाई की थी। सेक्टर-150 क्षेत्र में यातायात और निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इसके साथ ही नोएडा ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया था।
हालांकि, अब सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल निचले स्तर की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, इसलिए सीधे CEO पर कार्रवाई की गई।

CEO ने मांगी थी रिपोर्ट, फिर भी नहीं टली कार्रवाई

हादसे के बाद नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन CEO डॉ. लोकेश एम ने लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए थे कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न किया जाए और सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का दोबारा सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। इसके बावजूद सरकार ने यह मानते हुए कि जिम्मेदारी शीर्ष स्तर की है, उन्हें पद से हटा दिया।

पिता की तहरीर पर बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज

रविवार को मृतक इंजीनियर युवराज मेहता के पिता ने नॉलेज पार्क थाना में तहरीर दी। तहरीर में कहा गया कि हादसे का स्थल लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का प्लॉट था, जहां लगभग 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था और उसमें पानी भरा हुआ था। प्लॉट पर न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। पुलिस ने इस मामले में संबंधित कंपनियों के खिलाफ BNS की धारा 105, 106(1) और 125 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश

नोएडा इंजीनियर मौत मामला अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। CEO को हटाने की कार्रवाई से सरकार ने साफ संदेश दिया है कि शहरी विकास और सुरक्षा में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि आगे और किन अधिकारियों व संस्थाओं पर कार्रवाई होगी।

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