पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) द्वारा हाथरस अर्बन सिटी विकसित की जा रही है। इस ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर के लिए मास्टर प्लान-2041 तैयार किया जाएगा, जो लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित शहर के दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय करेगा।
मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार, कंसल्टेंट का चयन बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जिसमें तीन कंपनियों ने भाग लिया। आरवी इंजीनियरिंग ने 1.25 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाकर यह प्रोजेक्ट हासिल किया। अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों में गरुड़ यूएवी सॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और एलईए एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थीं, जिनकी वित्तीय बोलियां अधिक रहीं।
हाथरस अर्बन सिटी का मास्टर प्लान यमुना एक्सप्रेसवे मास्टर प्लान फेज-2 के अंतर्गत तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित योजना क्षेत्र 2,000 से 4,000 हेक्टेयर के बीच होगा। परियोजना सीमा में भविष्य में होने वाले किसी भी संशोधन को भी कंसल्टेंट के कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया है।
मास्टर प्लान को URDPFI गाइडलाइंस-2014, उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976 तथा अन्य लागू राज्य और केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। यह पूरा प्लान GIS फॉर्मेट में विकसित होगा। इसमें क्षेत्र की कैरींग कैपेसिटी, औद्योगिक विकास की संभावनाएं, जनसंख्या अनुमान, बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं, प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरणीय स्थिरता का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्य किया जाएगा, जिनमें-
मौजूदा स्थिति (Baseline Study) का विश्लेषण
भविष्य की जनसंख्या और रोजगार का अनुमान
इन्फ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी सिस्टम का मूल्यांकन
जोनिंग और भूमि उपयोग योजना
डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान
स्व-वित्तपोषित इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के प्रस्ताव
शहरी डिजाइन दिशानिर्देश
इसके साथ ही जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, भूमि उपयोग और घनत्व के संतुलन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मास्टर प्लान तैयार करते समय जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे क्षेत्रीय विकास कारकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे YEIDA क्षेत्र में शहरीकरण की दिशा और गति को तय करने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की अवधि नौ महीने निर्धारित की गई है, जिसमें अंतिम वैधानिक स्वीकृति का समय शामिल नहीं होगा। कार्य की शुरुआत 15 दिनों के भीतर इंसेप्शन रिपोर्ट से होगी। इसके बाद क्रमशः मौजूदा स्थिति का आकलन, विजन प्लानिंग, ड्राफ्ट मास्टर प्लान, हितधारकों से परामर्श और अंत में YEIDA एवं अन्य सक्षम प्राधिकरणों की मंजूरी के बाद हाथरस मास्टर प्लान-2041 को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नियोजित शहरीकरण और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।