माघ पूर्णिमा स्नान पर्व के अवसर पर प्रयागराज में सनातन आस्था का विराट स्वरूप देखने को मिला। पावन त्रिवेणी संगम पर करीब 2.1 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई और धर्म, आस्था व परंपरा का अनुपम संगम साकार हुआ। देश-विदेश से आए साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
माघ पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ ही इस वर्ष के कल्पवास का औपचारिक समापन हुआ। माघ मेले के दौरान संचित आध्यात्मिक ऊर्जा और साधना-संस्कारों को हृदय में संजोए हुए पांच लाख से अधिक कल्पवासी मेला क्षेत्र से विदा हुए। पूरे मेले के दौरान भक्ति, संयम और साधना का वातावरण बना रहा।
मुख्यमंत्री ने माघ पूर्णिमा स्नान का पुण्य लाभ अर्जित करने वाले समस्त पूज्य साधु-संतों, धर्माचार्यों, कल्पवास हेतु पधारे साधकों एवं श्रद्धालुओं का कोटिशः अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि यह महापर्व भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक समरसता की सशक्त अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री ने पावन स्नान पर्व के शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सफल आयोजन के लिए पुलिस प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, मेला प्रबंधन, स्वच्छता सेवकों, स्वयंसेवी संगठनों, नाविक बंधुओं तथा प्रदेश सरकार के सभी विभागों को हार्दिक साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही इतने विशाल आयोजन को सुरक्षित और सफल बनाया जा सका।
माघ पूर्णिमा स्नान पर्व ने एक बार फिर प्रयागराज को सनातन परंपरा, आस्था और अध्यात्म का विश्वस्तरीय केंद्र सिद्ध किया। श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक सहभागिता ने इस आयोजन को स्मरणीय बना दिया और भारतीय संस्कृति की अक्षुण्ण परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान की।