गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर आयोजित माघ मेले के चौथे प्रमुख स्नान पर्व बसंत पंचमी को सकुशल और सुरक्षित संपन्न कराने के लिए मेला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी हैं। बसंत पंचमी और अचला सप्तमी के आसपास पड़ने तथा सप्ताहांत की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष क्राउड मैनेजमेंट और रूट डाइवर्जन व्यवस्था लागू की है। अनुमान है कि इन तीन दिनों में करीब 3.5 करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
माघ मेले का चौथा स्नान पर्व 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचमी तिथि गुरुवार रात 2:28 बजे से प्रारंभ होकर 23 जनवरी की रात 1:56 बजे तक रहेगी। इस पुण्य काल में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर पीले वस्त्र, पीला अन्न और दान-पुण्य कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी को अचला सप्तमी (पुत्र सप्तमी/भानु सप्तमी) का पर्व है, जिसमें अन्न भंडारे की परंपरा निभाई जाती है। 24 जनवरी के सप्ताहांत के कारण तीनों दिन मेला क्षेत्र में भारी भीड़ रहने की संभावना है।
मेला प्रशासन के अनुसार संगम क्षेत्र में 3.5 किलोमीटर लंबे तट पर 24 घाटों का निर्माण किया गया है। घाटों की नियमित सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित रेलिंग, पेयजल, शौचालय और चिकित्सकीय सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। नदियों में निर्मल जल की उपलब्धता के साथ सभी बुनियादी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर सुगम आवागमन और सर्कुलेशन के लिए पांटून पुलों पर विशेष व्यवस्था की गई है।
परेड से झूंसी जाने हेतु: पांटून पुल संख्या 3, 5 और 7
झूंसी से परेड आने हेतु: पांटून पुल संख्या 4 और 6
आपात स्थिति के लिए पांटून पुल संख्या 1 और 2 पर भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।
भीड़ नियंत्रण और यातायात की सुगमता को ध्यान में रखते हुए 23 जनवरी (बसंत पंचमी) को नया यमुना पुल बंद रहेगा। इस दिन केवल पुराने यमुना पुल से ही आवागमन संभव होगा। मेला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि माघ मेले से संबंधित वाहनों को छोड़कर भारी और हल्के वाहनों को शहर की सीमा से पहले ही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दिया जाएगा।
मेला प्रशासन और पुलिस द्वारा भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, घाट सुरक्षा और निकासी व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल की तैनाती, कंट्रोल रूम से सतत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दल सक्रिय रहेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम स्नान का अनुभव मिल सके। मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, घाटों पर अनुशासन बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें, जिससे बसंत पंचमी-अचला सप्तमी का यह पावन स्नान पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।