मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का कुल क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो 60.39 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है और मार्च तक इसे 62 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे प्रदेश की आर्थिक मजबूती और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।
मुख्यमंत्री ने बैंकों से आह्वान किया कि वे ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) की तरह अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्राफ्ट/क्लस्टर’ (ओडीओसी) को भी ब्रांड के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ें। इससे छोटे व्यापारियों, कारीगरों और गिग वर्कर्स को बड़ा लाभ मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, एमएसएमई, युवा उद्यमियों और महिलाओं को ऋण उपलब्धता तेज और सरल बनाई जाए। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि आवेदन प्रक्रिया और पात्रता जांच में अनावश्यक देरी न की जाए, क्योंकि लाभार्थीपरक योजनाओं की सफलता बैंकों के सक्रिय सहयोग पर ही निर्भर करती है।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय पिछले आठ वर्षों में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह वृद्धि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और निवेश के अनुकूल माहौल को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर है। जनधन योजना, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और अटल पेंशन योजना जैसे कार्यक्रमों में प्रदेश ने शीर्ष प्रदर्शन किया है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जा सका है।
बैठक में जानकारी दी गई कि ऊर्जा, कृषि, उद्योग और एमएसएमई क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ने से प्रदेश के समग्र विकास को नई गति मिलेगी और रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि राज्य सरकार और बैंक मिलकर यदि समन्वय के साथ कार्य करें, तो प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य शीघ्रता से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बैंकों से जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा जताई।