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गोरखपुर में होली: गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में शोभायात्राओं में शामिल होंगे सीएम योगी

सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में 2 मार्च को होलिकादहन और 4 मार्च को भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में शामिल होंगे। गोरक्षपीठ की परंपरा से सामाजिक समरसता का संदेश।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
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गोरखपुर में होली: गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में शोभायात्राओं में शामिल होंगे सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इस वर्ष भी गोरखपुर में परंपरागत रूप से होली का पर्व मनाएंगे। गोरक्षपीठ की सहभागिता से आयोजित यह रंगपर्व सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है, जिसे देखने के लिए पूरे देश की नजर गोरखपुर पर रहती है।

2 मार्च को होलिकादहन, 4 मार्च को रंगभरी शोभायात्रा

सीएम योगी 2 मार्च की शाम होलिकादहन उत्सव समिति की ओर से पांडेयहाता से निकलने वाली भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद 4 मार्च की सुबह घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी होलिकोत्सव शोभायात्रा में वे आमजन के साथ फूल, अबीर और गुलाल बरसाकर होली मनाएंगे।

दशकों से सामाजिक समरसता का प्रतीक बना गोरखपुर का रंगपर्व

गोरखपुर में निकलने वाली ये दोनों शोभायात्राएं समतामूलक समाज का जीवंत प्रतिबिंब प्रस्तुत करती हैं। बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद इन आयोजनों में निरंतर सहभागिता करते रहे हैं। यही कारण है कि गोरखपुर का रंगपर्व दशकों से विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

नाथपंथ की मूल भावना का विस्तार

गोरक्षपीठ की परंपरा छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की दीवारें तोड़ने पर आधारित रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक लोककल्याण की भावना पहुंचाना ही नाथपंथ का मूल संदेश है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ द्वारा शुरू किए गए इस सामाजिक अभियान को आज गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ आगे बढ़ा रहे हैं।

कोरोना काल के बाद फिर लौटी परंपरा

वर्ष 1996 से 2019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व करने वाले योगी आदित्यनाथ ने 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण शोभायात्राओं में भाग नहीं लिया था। सफल कोरोना प्रबंधन के बाद 2022 से वे पुनः भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह की शोभायात्राओं में शामिल हो रहे हैं।

नानाजी देशमुख ने रखी थी शोभायात्रा की नींव

गोरखपुर में भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत वर्ष 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने की थी। इसका उद्देश्य होली के अवसर पर समाज में फैलने वाली फूहड़ता को दूर कर सांस्कृतिक और अनुशासित स्वरूप देना था। बाद में गोरक्षपीठ के जुड़ाव से यह पर्व सामाजिक चेतना का मजबूत माध्यम बन गया।

पूर्वी उत्तर प्रदेश का विशिष्ट रंगोत्सव

आज योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यह रंगोत्सव केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली जैसी मानी जाती है। भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर बिना किसी भेदभाव के सभी को शुभकामनाएं देते हैं और रंगों के माध्यम से एकता का संदेश देते हैं।

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