उत्तर प्रदेश सरकार के State Transformation Commission द्वारा लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यशाला “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” का आयोजन किया गया। यह पहल माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोमती नदी को पुनः स्वच्छ, अविरल और जीवनदायिनी स्वरूप में लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी प्रयास मानी जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक समन्वित और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करना रहा।
इस राज्यस्तरीय कार्यशाला में नदी पुनरुद्धार से जुड़े सभी प्रमुख पहलुओं-नीति निर्धारण, वित्तीय रणनीति, तकनीकी समाधान, संस्थागत ढांचा, संचालन व्यवस्था और नागरिक सहभागिता-पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने सुझाव साझा किए।
प्रारंभिक सत्र में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसमें जल प्रवाह में कमी, गाद जमाव, नदी तल की बिगड़ती संरचना, तटों पर अतिक्रमण तथा घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के अनियंत्रित प्रवाह को प्रमुख समस्याओं के रूप में चिन्हित किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि लखनऊ महानगर क्षेत्र में बिना उपचार के सीवेज का नदी में गिरना प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि गोमती नदी का संरक्षण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी भी है। गोमती सदियों से अवध क्षेत्र की जीवनरेखा रही है और इसके पुनर्जीवन से जनस्वास्थ्य, आजीविका, पर्यटन, कृषि और जैव विविधता को व्यापक लाभ मिलेगा।
कार्यशाला के वित्तीय सत्र में गोमती पुनरुद्धार परियोजना के लिए आवश्यक संसाधनों और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर चर्चा हुई। राज्य बजट, केंद्र सरकार की योजनाएं, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान, निजी निवेश, CSR फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए संसाधन जुटाने पर सहमति बनी। इस दौरान Finance+ मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें वित्तीय निवेश के साथ तकनीकी नवाचार और कुशल प्रबंधन को जोड़ा गया।
तकनीकी सत्र में अपशिष्ट जल को समस्या नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में उपयोग करने की अवधारणा पर बल दिया गया। आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल पुनर्चक्रण और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाने पर सहमति बनी। “वन सिटी वन ऑपरेटर” मॉडल सहित कई आधुनिक समाधान प्रस्तुत किए गए, जिन्हें व्यावहारिक और प्रभावी बताया गया।
नागरिक सहभागिता पर केंद्रित सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि बिना जनभागीदारी कोई भी नदी पुनरुद्धार अभियान सफल नहीं हो सकता। सोशल एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन (SBCC) के माध्यम से स्वच्छता की आदतें विकसित करने, जागरूकता बढ़ाने और नदी संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने पर विशेष बल दिया गया।
समापन सत्र में दिनभर की चर्चाओं का सार प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि सभी सुझावों को राज्यस्तरीय कार्ययोजना में शामिल कर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पंचायती राज विभाग, नगर विकास विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी।
कार्यशाला में यह निष्कर्ष निकला कि विभागीय तालमेल, तकनीकी दक्षता, वित्तीय पारदर्शिता और सामाजिक सहभागिता के समन्वय से ही गोमती नदी को उसकी प्राकृतिक, स्वच्छ और अविरल धारा में लौटाया जा सकता है। ‘Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026’ आने वाले वर्षों में न केवल नदी संरक्षण की मिसाल बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सतत विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।