प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज के.के.वी. गर्ल्स इंटर कॉलेज, चारबाग, लखनऊ में विद्यालय की छात्राओं के साथ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘परीक्षा पर चर्चा 2026’ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा। इस अवसर पर राज्यपाल ने छात्राओं को अध्ययन और परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए प्रेरित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उत्साहवर्धन किया।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री द्वारा ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के माध्यम से दिए गए मार्गदर्शन और सुझावों को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल परीक्षा की तैयारी में सहायक है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

आज आयोजित ‘परीक्षा पर चर्चा’ के नौवें संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा के तनाव, आत्मविश्वास, लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और संतुलित जीवन पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने छात्रों से पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि सीखने की एक आनंददायक यात्रा के रूप में देखने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी मार्गदर्शन साझा किया। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उन्हें सकारात्मक सहयोग देना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे प्रतिदिन सोने से पहले अगले दिन के कार्यों की सूची बनाएं और दिन के अंत में आत्ममंथन करें। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि वर्ष 2047 में यही छात्र-छात्राएं देश की सबसे सक्रिय पीढ़ी होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन कौशल और पेशेवर कौशल दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शरीर का संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति गिर जाता है, वैसे ही जीवन में किसी एक पक्ष पर अत्यधिक जोर देना नुकसानदायक हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि परीक्षा कभी भी जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकती। शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे तनावमुक्त रहकर सीखने की प्रक्रिया का आनंद लें और बीते समय की चिंता छोड़कर शेष समय का बेहतर उपयोग करें।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को छात्रों से एक कदम आगे रहने की सलाह दी, ताकि लक्ष्य चुनौतीपूर्ण रहे लेकिन असंभव न हो। वहीं छात्रों को शिक्षक द्वारा पढ़ाए जाने वाले पाठ का पूर्व अध्ययन कर शिक्षक से दो कदम आगे रहने का प्रेरक संदेश दिया।

गेमिंग पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक कौशल है और व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकता है। उन्होंने छात्रों को केवल गेम खेलने के बजाय गेम निर्माता बनने और भारतीय संस्कृति एवं कथाओं पर आधारित गेम विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह, अनुशासन और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला।