इस वर्ष मानसून से पहले गोरखपुर शहर के करीब आधे हिस्से को जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलने जा रही है। इसका आधार बनेगी गोड़धोइया नाला परियोजना, जिसकी कुल लागत 495 करोड़ रुपये है। परियोजना की अब तक 82 प्रतिशत भौतिक प्रगति पूरी हो चुकी है और इसे जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना पूरी होते ही शहर के उत्तरी छोर के लगभग डेढ़ दर्जन वार्डों में जलभराव की पुरानी समस्या समाप्त हो जाएगी।
गोरखपुर को स्वच्छ, सुंदर और जलभराव मुक्त बनाने की दिशा में यह परियोजना योगी आदित्यनाथ की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। नाले के जीर्णोद्धार की शुरुआत से लेकर निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों तक मुख्यमंत्री स्वयं कई बार स्थल निरीक्षण कर चुके हैं। कई दशकों तक उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार रहा गोड़धोइया नाला लगभग विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच गया था। इसे पुनर्जीवित करने के लिए पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और सीवेज ट्रीटमेंट की व्यापक योजना तैयार की गई।
परियोजना के तहत कुल 9.25 किमी लंबाई में नाला निर्माण किया जाना है, जिसमें से अब तक 8.35 किमी नाला तैयार हो चुका है। इसके साथ ही 38 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य लगभग 83 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके अलावा परियोजना में 17.94 किमी इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन, 18 ब्रिज/कल्वर्ट, 130 नालों-नालियों का इंटरसेप्शन और 61 एमएलडी क्षमता के 15 मेन पंपिंग स्टेशन शामिल हैं। अब तक 15 में से 14 पंपिंग स्टेशनों पर लिफ्ट कंक्रीटिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है।
परियोजना पूरी होने के बाद गोड़धोइया नाला लगभग साढ़े तीन लाख की आबादी को जलभराव की समस्या से निजात दिलाएगा। बिछिया जंगल तुलसीराम (पूर्वी एवं पश्चिमी), शिवपुर शहबाजगंज, जंगल शालिग्राम, रेलवे बिछिया कॉलोनी, शाहपुर, भेड़ियागढ़, घोसीपुरवा, सेमरा, बशारतपुर, मानबेला, राप्तीनगर, लोहिया नगर, जंगल नकहा, राम जानकी नगर, शक्तिनगर और चक्सा हुसैन जैसे क्षेत्रों से निकलने वाला सीवेज नाले में बहने के बजाय एसटीपी में शोधित किया जाएगा।
नाले में बहने वाले सीवेज को 38 एमएलडी एसटीपी में शोधन के बाद रामगढ़ताल में प्रवाहित किया जाएगा। नाले को अतिक्रमण मुक्त किए जाने से इसके कैचमेंट एरिया में आने वाली कॉलोनियों में भी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होगा।
कार्यदायी संस्था जल निगम (शहरी) के अनुसार शेष बचे कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। लक्ष्य है कि मानसून से पहले परियोजना का अधिकांश कार्य धरातल पर दिखे और गोरखपुरवासियों को जलभराव से बड़ी राहत मिल सके।