कुशीनगर जिले में सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। महज 20 दिन पहले संपादित किए गए ठोकर और पार्कयू पाइन निर्माण कार्य अब दरकने लगे हैं, जिससे विभाग की लापरवाही और हेराफेरी सामने आ रही है। ये कार्य यादव एंड संस कंपनी के अधीन संपन्न हुए थे, जिनमें लाखों रुपए की अनियमितताएँ देखने को मिली हैं।
सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड 2 में कुल 644.4 लाख रुपये की लागत से बनाए गए ठोकर और पार्कयू पाइन के निर्माण का निरीक्षण यूपी की बात की टीम ने खड्डा तहसील स्थित भैंसहा ठोकर नंबर चार पर किया। निरीक्षण में पाया गया कि जिस ठोकर में 7 से 8 लेयर जाली लगनी चाहिए थी, वहाँ केवल दो-तीन लेयर जाली लगाई गई। वहीं आधी अधूरी फोटो प्रदर्शित करके विभाग अपनी सफलता दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ठोकर दरकने लगा है और स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि और पूर्व जिला पंचायत सदस्य संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही और अभियंता की मिलीभगत के कारण इस तरह के गुणवत्ता विहीन कार्य संपन्न हुए। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जब काम हो रहा था तब उन्होंने विरोध जताया, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
इस समय नेपाल में भारी वर्षा के कारण बाढ़ का खतरा है और सितंबर महीने में पूर्वांचल के कई हिस्सों में बाढ़ की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यदि नदी में अधिक जल छोड़ा गया तो गुणवत्ता विहीन ठोकर और पार्कयू पाइन के कारण कई एकड़ उपजाऊ भूमि और सैकड़ों घर पानी में डूब सकते हैं।
प्रदेश के जल संसाधन मंत्री द्वारा यह दावा किया गया कि बाढ़ से निपटने के लिए सारी व्यवस्थाएँ पूरी कर दी गई हैं, लेकिन जमीन पर निरीक्षण से यह स्पष्ट हो गया कि विभाग भ्रष्टाचार और लापरवाही में डूबा हुआ है। न तो कोई बढ़ चौकी बनाई गई है, न अधिकारी साइट पर नजर आते हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि विभाग द्वारा दी जा रही घोषणाएँ केवल दावे तक ही सीमित हैं, जबकि वास्तविकता में लाखों की हेराफेरी और आम जनता को होने वाले नुकसान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कुशीनगर की जनता अब विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को बाध्य है, क्योंकि आने वाली बाढ़ में उनकी फसलों और घरों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।