उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की शीर्ष समिति की पांचवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल जीवन मिशन के शेष कार्यों की समीक्षा की गई और उन्हें तय मानकों व गुणवत्ता के साथ तेज़ी से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों के शेष विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को शीघ्र नल कनेक्शन से आच्छादित करने पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को शेष संस्थानों की सूची तत्काल मिशन को उपलब्ध कराने और प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भारत सरकार द्वारा चिन्हित प्राथमिकता क्षेत्रों-बाढ़ व सूखा प्रभावित इलाके, जेई/एईएस प्रभावित जनपद, सांसद आदर्श ग्राम तथा अनुसूचित जाति/जनजाति बहुल क्षेत्रों-में योजनाओं के कार्य वरीयता के साथ पूर्ण कराने के सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक में जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल जीवन मिशन (जल गुणवत्ता अनुश्रवण एवं निगरानी) कार्यक्रम के तहत सभी ग्रामों में प्रशिक्षित महिलाओं (FTK Users) के माध्यम से समुदाय स्तर पर जल परीक्षण हेतु एफटीके (Arsenic Kit, Without Arsenic Kit एवं H2S Vials) की आपूर्ति और NABL मान्यता प्राप्त राज्य प्रयोगशालाओं से बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए। दूषित नमूनों पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई पर भी बल दिया गया।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्माण कार्यों के लिए एजेंसियों से किए गए अनुबंधों की समयावधि दिसंबर 2027 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को समिति ने स्वीकृति प्रदान की।
समीक्षा में बताया गया कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों के कुल 97,070 राजस्व ग्राम पाइप पेयजल योजनाओं से आच्छादित किए जा चुके हैं। सभी जनपदों से प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुके हैं और पुनः प्रमाणन की प्रक्रिया प्रचलित है।
प्रदेश के 2,67,20,930 ग्रामीण परिवारों में से 30 नवंबर 2025 तक 2,42,74,000 परिवारों (90.84%) को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 1,16,524 विद्यालयों में से 1,16,340 (99.84%) और 1,56,304 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 1,55,136 (99.25%) नल कनेक्शन से आच्छादित हैं।
प्रदेश में पेयजल गुणवत्ता परीक्षण के लिए 01 राज्य स्तरीय और 75 जनपदीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं। राज्य प्रयोगशाला को केमिकल व बैक्टीरियोलॉजिकल पैरामीटर्स में, जबकि जनपदीय प्रयोगशालाओं को केमिकल पैरामीटर्स में NABL मान्यता प्राप्त है। बुंदेलखंड के 09 जनपदों में 62 WTP पर स्थापित प्रयोगशालाओं में से 60 क्रियाशील हैं और 43 को केमिकल पैरामीटर्स में NABL मान्यता मिली है।
समस्त जनपदों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) से जल जांच हेतु लगभग 5 लाख ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इनके द्वारा परीक्षण डेटा WQMIS पोर्टल पर अपलोड किया जाता है और प्रति टेस्ट ₹20 (अधिकतम ₹400 मासिक) के मानदेय के रूप में अब तक ₹5.69 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक जल निगम (ग्रामीण) डॉ. राज शेखर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।