1. हिन्दी समाचार
  2. अथॉरिटी की बात
  3. भ्रष्टाचारी जीएम: भ्रष्टाचारी जीएम ट्रैफिक पर कार्रवाई आखिर कब?

भ्रष्टाचारी जीएम: भ्रष्टाचारी जीएम ट्रैफिक पर कार्रवाई आखिर कब?

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार नोएडा अथॉरिटी को दोनों हाथों से भरभर कर पैसा देती है ताकि लोग सुरक्षित रहें और अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर सकें। लेकिन, उस पैसे का जीएम ट्रैफिक द्वारा इतना दुरुपयोग किया गया कि घटना स्थल पर न Cat Eye लगी थी, न ही स्पीड ब्रेकर था।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
Updated:
भ्रष्टाचारी जीएम: भ्रष्टाचारी जीएम ट्रैफिक पर कार्रवाई आखिर कब?

राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के Sector-150 में Software Engineer Yuvraj Mehta की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बारिश के बाद पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में उनकी Car Accident के बाद डूबने से मौत हो गई। ऐसे में अगर वहां Cat Eye लगी होती, अगर वहां Reflector yellow पट्टी लगी होती,अगर वहां स्पीड ब्रेकर होता तो शायद आज Yuvraj Mehta बच जाता और अपने परिवार के साथ या ऑफिस में अपने कलिग के साथ जिंदगी के लमहों को जी रहा होता। लेकिन जीएम ट्रैफिक की लापरवाही ने उससे उसकी जिंदगी को ही छीन लिया। ऐसे में कमिश्नर साहब क्या जांच करते हैं यह देखने वाली बात है। वहीं सीएम योगी द्वारा बनाई गई SIT टीम की पहुंच, भ्रष्टाचारी जीएम तक पहुंचती है या नहीं ये तो समय ही बताएगा…

वहीं समय पर मदद न मिलने से यह हादसा जानलेवा साबित हुआ, जिसके बाद Noida Administration और Noida Authority के नकामी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी के साथ नोएडा सेक्टर 150 में हुई यह घटना न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलताओं को भी उजागर करती है।

हादसे का विवरण

27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत उस समय हुई जब बारिश के बाद उनकी कार पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में गिर गई। समय पर मदद न मिल पाने के कारण डूबने से उनकी मृत्यु हो गई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है।

प्रशासनिक कार्रवाई

सरकार ने शुरुआती कदम उठाते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया है और एक जूनियर इंजीनियर (JE) की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य अधिकारियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस भी जारी किए गए हैं।

जीएम ट्रैफिक पर गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि सेक्टर 150 की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है, जिसके लिए जीएम ट्रैफिक एसपी सिंह को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन पर आरोप है कि वे अवैध ठेलों और सड़क किनारे अतिक्रमण को संरक्षण देते हैं, जिससे सड़कें संकरी हो गई हैं और जल निकासी की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है,।

शक्ति का केंद्रीकरण और जवाबदेही की कमी

एसपी सिंह के पास वर्तमान में जीएम हेल्थ, जीएम ट्रैफिक और जीएम सिविल जैसे कई महत्वपूर्ण और शक्तिशाली विभागों की जिम्मेदारी है। जानकारों का मानना है कि इतने अधिक विभागों का नियंत्रण एक ही अधिकारी के पास होने से पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होती है, क्योंकि जमीनी समस्याओं (जैसे जलभराव और ट्रैफिक) को नजरअंदाज कर दिया जाता है。

भ्रष्टाचार और जांच की मांग

स्थानीय निवासियों और युवराज के परिजनों का मानना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि कथित भ्रष्टाचार का मामला भी हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इस पूरे मामले और ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली की एसआईटी (SIT) जांच करवा सकती है ताकि दोषियों की पहचान की जा सके। संक्षेप में यदि कहा जाए तो यह मामला केवल एक बुनियादी ढांचे की विफलता नहीं है, बल्कि यह अधिकारों की भूख और विभागों के असंतुलित बंटवारे की ओर भी इशारा करता है, जिसके कारण अंततः एक निर्दोष व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें गूगल न्यूज़, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...