1. हिन्दी समाचार
  2. लखनऊ
  3. 77वें गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी का संदेश… संविधान, कर्तव्य और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ही बनेगा विकसित भारत

77वें गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी का संदेश… संविधान, कर्तव्य और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ही बनेगा विकसित भारत

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जबकि इसे 26 नवम्बर 1949 को अंगीकार किया गया था। इसी कारण आज पूरा देश 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाता है।

By: Abhinav Tiwari  RNI News Network
Updated:
77वें गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी का संदेश… संविधान, कर्तव्य और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ही बनेगा विकसित भारत

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने भारत के संविधान के ऐतिहासिक महत्व, नागरिकों के कर्तव्यों और ‘विकसित भारत’ की संकल्पना पर विस्तार से अपने विचार रखे।

संविधान का महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जबकि इसे 26 नवम्बर 1949 को अंगीकार किया गया था। इसी कारण आज पूरा देश 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाता है। उन्होंने कहा कि संविधान की उद्घोषणा-“हम भारत के लोग”-हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यही संविधान भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाता है और नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।

स्वतंत्रता और संविधान निर्माण के महान नायकों को नमन

सीएम योगी ने उन महान विभूतियों को नमन किया, जिन्होंने देश की आजादी और संविधान निर्माण में अमूल्य योगदान दिया-

  • महात्मा गांधी, जिनके नेतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन नई ऊंचाइयों तक पहुंचा।

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान सभा के अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति।

  • बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान के शिल्पकार।

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल, आधुनिक भारत के शिल्पकार और लौह पुरुष।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस, क्रांतिकारियों के सिरमौर।

संविधान के मूल मंत्र: न्याय, समता और बंधुता

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के तीन मूल शब्द-न्याय, समता और बंधुता- हमारे लोकतंत्र की आत्मा हैं। इसके साथ यह भी स्पष्ट किया कि हर नागरिक को जाति, मत, मजहब, क्षेत्र या भाषा के भेदभाव के बिना न्याय मिलना चाहिए। जब समाज में समता और बंधुता का भाव मजबूत होगा, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को कोई रोक नहीं पाएगा।

नागरिकों के कर्तव्य और उत्तरदायित्व

सीएम योगी ने कहा कि संविधान का असल संरक्षक भारत का नागरिक है। हर नागरिक, संस्था, मंत्रालय और विभाग को अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि कोई भी व्यक्ति संविधान, न्याय या व्यवस्था से ऊपर नहीं है। यदि कोई ऐसा दावा करता है, तो वह संविधान की अवमानना करता है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।

विकसित भारत की संकल्पना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक समृद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की खुशहाली और सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा गांवों और गलियों से शुरू होकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़नी चाहिए। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि देश को जाति या भाषा के आधार पर विभाजित करने वाले षड्यंत्रों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।

राष्ट्र निर्माण का संकल्प

अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है। संविधान के मूल्यों को आत्मसात कर, एकजुट होकर कार्य करने से ही भारत और उत्तर प्रदेश विकास, समरसता और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें गूगल न्यूज़, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...