मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभिन्न औद्योगिक विकास प्राधिकरणों एवं आवास विकास परिषद द्वारा अर्जित, विकसित तथा आवंटित भूमि की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने के लिए लैंड बैंक की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस रणनीति तैयार करना रहा। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बढ़ते निवेश को देखते हुए लैंड बैंक को सुदृढ़ एवं विस्तारित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी औद्योगिक प्राधिकरणों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सके।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के बढ़ते रुझान के मद्देनज़र भूमि अधिग्रहण, विकास एवं आवंटन की प्रक्रिया समयबद्ध और सुव्यवस्थित होनी चाहिए। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, जलापूर्ति और लॉजिस्टिक्स जैसी आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में 78 हजार एकड़ भूमि आवंटन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि अगले वित्तीय वर्ष तक औद्योगिक मांग के अनुसार कितनी अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी, इसका यथार्थ आकलन कर नए लक्ष्य तय किए जाएं।
बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग सहित उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण, बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे लैंड बैंक की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
मुख्य सचिव ने भूमि आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और निवेशक-अनुकूल बनाने पर जोर दिया, ताकि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। बैठक में प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद, सीईओ इन्वेस्ट यूपी विजय किरण आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।