हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह वर्ष का अंतिम महीना होता है, जो प्रकृति और जीवन में नवीन ऊर्जा का संचार करता है। सन 2025 में यह मास 13 फरवरी से 14 मार्च तक रहेगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह वर्ष का अंतिम महीना होता है, जो प्रकृति और जीवन में नवीन ऊर्जा का संचार करता है। सन 2025 में यह मास 13 फरवरी से 14 मार्च तक रहेगा।
प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। महाकुंभ के समापन से 15 दिन पहले ही स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 45 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
महाकुंभ के दौरान सेक्टर-12 में आयोजित परमधर्मसंसद में हिंदू पहचान, दिनचर्या और संस्कारों पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हिंदू धर्म की पहचान और उसके महत्व को बनाए रखने पर जोर दिया।
महाकुंभ 2025 में न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा और परंपराओं की शिक्षा भी दी जा रही है। देवसेना नामक संगठन तीर्थयात्रियों को शास्त्रों के साथ शस्त्रों की भी जानकारी दे रहा है।
महाकुंभ 2025 में स्वच्छता और व्यवस्था का खास ध्यान रखा गया है। 13 से 31 जनवरी के बीच संगम में 31.46 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, जो दिल्ली की कुल आबादी से नौ गुना ज्यादा है।
गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद प्रामाणिकता और परंपरा पर आधारित होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित।
प्रयागराज में किसानों के सम्मान में स्थापित हुआ अनूठा आस्था केंद्र, चार बार होती है भव्य आरती...
हाकुम्भनगर में उमड़ रहे आस्था के जनसमुद्र को संभालने और सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश के हर कोने से लोग तत्पर दिख रहे हैं।
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 का व्यापक प्रभाव अब काशी (वाराणसी) में भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज से वाराणसी पहुंच रहे हैं और काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कर रहे हैं।
यूपी के जनपद महराजगंज से है जहां घुघली नगर के बैकुंठ धाम के छोटी गंडक नदी में सनातन धर्म के सबसे बड़े स्नान महा पर्व मौनी अमावस्या पर आज लाखो श्रद्धालुओं ने नदी में आस्था की डुबकी लगाई और परंपरा के अनुरूप स्नान-ध्यान व दान कर पुण्य के भागी बने।
महाकुंभ का आयोजन न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह जीवन, मृत्यु और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों को जानने और समझने का भी एक माध्यम है। महाकुंभ के दौरान नागा साधुओं की उपस्थिति और उनकी जीवन शैली लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का वार्षिकोत्सव आज से प्रारंभ हो गया है। इस आयोजन को 'प्रतिष्ठा द्वादशी' का नाम दिया गया है। इस शुभ अवसर पर रामलला का पंचामृत से महाभिषेक किया गया।
लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर उत्साह का माहौल है। आज से नहाय खाय के साथ छठ पूजा का महापर्व शुरू हो जाएगा, इसकी तैयारियों को लेकर जनपद के विभिन्न नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने छठ घाटों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।