राज्य ऋण संगोष्ठी और ‘स्टेट फोकस पेपर 2026-27’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में ऐतिहासिक आर्थिक परिवर्तन दर्ज किया है। जो प्रदेश कभी देश की अर्थव्यवस्था में 8वें-9वें स्थान पर था, वह आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 में राज्य की जीएसडीपी (GSDP) 11.77 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 31 मार्च तक लगभग 36 लाख करोड़ रुपये पहुँचने का अनुमान है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपये हो गई है। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। भारत की कुल कृषि योग्य भूमि का मात्र 11 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद प्रदेश देश के 21 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न उत्पादन में योगदान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि देश के कुल 55 प्रतिशत गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी है। वहीं, इथेनॉल उत्पादन में भी प्रदेश पहले स्थान पर है, जहाँ उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है। सहकारिता क्षेत्र में सुधार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले डिफॉल्टर घोषित 16 जिला सहकारी बैंकों में से 15 अब लाभ की स्थिति में आ चुके हैं। सरकार के प्रयासों से कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत से अधिक पहुँच गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य का क्रेडिट-डेबिट रेशियो, जो पहले 43 प्रतिशत था, अब बढ़कर 61 प्रतिशत हो गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 2026-27 तक 65 प्रतिशत तक ले जाना है। डिजिटल गवर्नेंस के तहत ई-केसीसी (E-KCC) व्यवस्था लागू होने से किसानों को ऋण स्वीकृति में लगने वाला समय 25-30 दिनों से घटकर केवल 5 मिनट रह गया है, जिससे किसानों को त्वरित वित्तीय सहायता मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) योजना और ब्रांडिंग के चलते उत्तर प्रदेश के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य का निर्यात 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयाँ कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 3 करोड़ परिवारों को आजीविका मिल रही है। यह रोजगार सृजन की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कई प्रेरक उदाहरण साझा किए। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कसिया में दिव्यांग जनों द्वारा संचालित मिल्क प्रोड्यूसर एफपीओ को उन्होंने बड़ी सफलता बताया। वहीं, मथुरा में 750 महिलाओं के नेतृत्व वाली सरसों उत्पादन कंपनी सरसों के तेल की प्रोसेसिंग से अच्छा मुनाफा कमा रही है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए ‘सीमार्ट’ की स्थापना की घोषणा की, जिससे ‘लखपति दीदी’ अभियान को और मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की लागत में प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये तक की बचत हुई है। वहीं, डीएसआर (DSR) पद्धति से धान उगाने वाले किसानों को ढाई गुना तक अधिक मुनाफा मिला है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख बिजली चालित ट्यूबवेलों को सोलर पैनल से जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य ऋण संगोष्ठी और स्टेट फोकस पेपर 2026-27 उत्तर प्रदेश को आर्थिक, कृषि और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज है। सरकार, बैंकिंग संस्थान और उद्यमी मिलकर प्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।