उत्तर प्रदेश में अप्रैल के महीने में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेमौसम बारिश, तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने कई जिलों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रयागराज, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, कासगंज, एटा और अलीगढ़ सहित कई जिलों में किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
अलीगढ़ में लगातार दो दिन की तेज बारिश और आंधी ने पकी हुई फसल को चौपट कर दिया। खेतों में कटी फसल भी पूरी तरह भीग गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी और उन्हें उम्मीद थी कि इस बार फसल से कर्ज चुका पाएंगे, लेकिन अब वे और अधिक संकट में फंस गए हैं।
प्रयागराज में भी तेज आंधी और बारिश ने तबाही मचाई। करछना, मेजा, फूलपुर समेत कई इलाकों में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। कटी फसल भीग गई और खड़ी फसल तेज हवा के कारण गिर गई। कई किसानों के बनाए गए गट्ठर हवा में उड़कर दूसरे खेतों में पहुंच गए।
पीलीभीत के तराई क्षेत्रों में भी बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा असर देखा गया। कटी हुई फसल खेतों में ही भीगकर खराब हो गई। वहीं, जो किसान अपनी फसल मंडी लेकर पहुंचे थे, उनकी उपज भी बारिश में भीग गई।
अयोध्या में मौसम के बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन किसानों के लिए यह चिंता का कारण बन गया। तेज हवाओं और हल्की बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, इस बेमौसम बारिश ने किसानों की आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जहां आम लोगों को राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए यह मौसम संकट बनकर आया है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जनहानि, पशुहानि और फसल नुकसान झेलने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा दिया जाए। साथ ही जिन परिवारों के घर नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत मिल सके।

