लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश की विशाल युवा आबादी को रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ने के लिए इस प्रकार की समेकित व्यवस्था समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति वाला राज्य है। तेजी से बढ़ते निवेश, औद्योगिक विस्तार और बदलती तकनीकी जरूरतों को देखते हुए ऐसे संस्थागत ढांचे का निर्माण जरूरी है, जो युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योगों की वास्तविक मांग के अनुरूप तैयार किए जाएं ताकि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के लिए भटकना न पड़े।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की अवधारणा विकसित की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कर बेहतर रोजगार और उद्यमिता के अवसर प्रदान करना है।
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परियोजना के तहत प्रदेश में 9 क्षेत्रीय जोनों की हब एवं स्पोक संरचना विकसित की जाएगी। प्रत्येक जोन में एक उत्कृष्टता केंद्र (हब) और उससे जुड़े क्षेत्रीय कौशल विकास केंद्र (स्पोक) स्थापित होंगे। हब स्तर पर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और करियर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जबकि स्पोक केंद्र स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
इस परियोजना में कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक सुविधाएं, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता तंत्र, डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषा प्रशिक्षण और उद्यमिता सहायता जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर नौकरी और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एकीकृत मंच मिलेगा।
बैठक में जानकारी दी गई कि पहले चरण में मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ और कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध है। परियोजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण एवं प्रमाणन प्रदान किया जाएगा। साथ ही 10 लाख से अधिक जॉब मैचिंग और प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को बढ़ावा देने और लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। परियोजना के लिए सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ITE) और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था ITEES के अनुभवों का लाभ लिया जाएगा, जिससे कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सके।

