मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार पारदर्शी तरीके से निवेशको को आंमत्रित कर निवेश करने के लिये सुविधा प्रदान की जा रही है। लेकिन यूपी की बात की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला यूपी इंवेस्ट के माध्यम से निवेश करने वाले निवेशको को अकारण ही परेशान किया जा रहा है। निवेशको को यूपी इंवेस्ट के माध्यम से प्रदेश में जमीनों का आवंटन सहित अन्य सुविधाएं दी जाती है। लेकिन जिस तरह से इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुति के बाद भी पत्रावलियो को छह छह माह तक लटकाया जा रहा है और बार बार आपत्ति लगाई जा रही है आखिर मंशा क्या है।
कही इसमें बड़ा भ्रष्टाचार तो नही है, यूपी इंवेस्ट के परीक्षण एवं इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुतियों के बाद पत्रावली शासन से संस्तुति होकर मंत्री स्तर तक जाती है और फिर उन निवेशक की पत्रावली में बार बार आपत्ति लगाकर वापस की जाती है। इससे प्रदेश में निवेश करने वाले लोग निराश हो रहे है। इस समस्त विषय की जानकारी इंवेस्ट यूपी एवं शासन के डाटा रिकॉर्ड में दर्ज है। कुछ निवेशक ऐसे है जिनको एलवाई मिले हुये 15 माह से ज्यादा का समय बीत गया लेकिन अभी तक उनकी पत्रावली उच्च स्तर से अनुमोदित नही हुई। किसी किसी निवेशक की पत्रावली में आधा दर्जन बार आपत्ति लगाई गई है। मुख्यमंत्री जी लगातार प्रदेश में निवेश के लिये निवेशको को आमंत्रित कर रहे है और निवेशको को सुविधाएं देने की बात कर रहे है। आखिर कौन लोग है जो निवेशको की पत्रावलियो पर बार बार आपत्ति लगा रहे है। इस संबंध में यूपी इंवेस्ट के सीईओ एवं शासन के अधिकारियो से यूपी की बात ने जब सवाल पूछा तो उन्होने मौन साध लिया। क्या मुख्यमंत्री जी इसकी जांच करायेंगे।

