लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों को समय पर जमीन पर उतारने के लिए विभागों को खर्च की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा है कि अगले दो महीनों में कुल बजट का कम से कम 60 प्रतिशत खर्च सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, इस अवधि में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में उच्च बजट वाले प्रमुख विभागों की वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। बैठक में बजट आवंटन, वित्तीय स्वीकृतियों और अब तक हुए वास्तविक खर्च का विभागवार आकलन किया गया।
₹9.99 लाख करोड़ के बजट में 51.6% वित्तीय स्वीकृतियां
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश का कुल बजट ₹9,99,056.48 करोड़ निर्धारित किया गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब ₹1.58 लाख करोड़ अधिक है। विकास योजनाओं के लिए बजट में ₹5,01,957.09 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, अब तक ₹5,15,918.44 करोड़, यानी कुल बजट का लगभग 51.6 प्रतिशत, वित्तीय स्वीकृतियों के रूप में जारी किया जा चुका है। वहीं, प्रदेश में अब तक ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज किया गया है।
विभागों की नियमित समीक्षा करेंगे वित्त मंत्री
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को निर्देश दिया कि वे संबंधित विभागीय मंत्रियों के साथ बजट की नियमित और बिंदुवार समीक्षा करें। जिन विभागों में नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं या तकनीकी कारणों से धनराशि जारी करने अथवा खर्च करने में परेशानी आ रही है, उन मामलों का जल्द समाधान कराया जाए। वित्त विभाग को भी बजट खर्च की लगातार निगरानी करने और प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रमुख विभागों की वित्तीय स्थिति पर भी हुई चर्चा
बैठक में प्रदेश के 30 बड़े बजट वाले विभागों की वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:
बेसिक शिक्षा विभाग: ₹82,245.68 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹65,982.04 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं, जबकि ₹31,718.92 करोड़ खर्च किए गए हैं।
गृह विभाग: ₹43,891.37 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़ की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं। अब तक ₹14,712.68 करोड़ का व्यय दर्ज हुआ है।
लोक निर्माण विभाग: ₹45,270.69 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹27,375.91 करोड़ की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹14,178.60 करोड़ खर्च हुए हैं।
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं। विभाग का वास्तविक खर्च ₹10,286.50 करोड़ है।
ऊर्जा विभाग: ₹73,348.56 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग: बजट के मुकाबले करीब 54 प्रतिशत खर्च दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों को बजट का प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। धनराशि की वास्तविक जरूरत और उसके उपयोग की क्षमता को ध्यान में रखते हुए बजट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने पर जोर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात सुधारने की जरूरत बताई। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गांव और किसान स्तर पर मैपिंग की जाए। इस प्रक्रिया के जरिए उन किसानों की पहचान की जाएगी जो बैंकिंग सुविधाओं और कृषि ऋण से अभी तक नहीं जुड़ पाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में भी काम करने को कहा गया है।
जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग पर विशेष फोकस
उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए एमएसएमई विभाग को जीआई टैग वाले उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का जोर स्थानीय शिल्प और उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ उनकी पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने पर है। इसके लिए प्रभावी मार्केटिंग और ब्रांडिंग रणनीति तैयार करने को कहा गया है।
केंद्र से मिलने वाली राशि के लिए समन्वय बढ़ाने के निर्देश
केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागों को भारत सरकार से मिलने वाली लंबित धनराशि और स्वीकृतियों के मामलों में सक्रियता बढ़ाने को कहा। उन्होंने विभागीय मंत्रियों से संबंधित केंद्रीय मंत्रियों के साथ समन्वय कर लंबित मामलों का समाधान कराने के निर्देश दिए, ताकि केंद्रीय सहायता पर निर्भर योजनाओं की प्रगति प्रभावित न हो।
विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास और जनकल्याण से जुड़ी परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। निर्माण अथवा अन्य कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है। उन्होंने विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों से फील्ड में जाकर योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करने को भी कहा।
समय पर बजट खर्च करने की जिम्मेदारी विभागों की
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं के लिए धन की उपलब्धता में कमी नहीं आने दी जाएगी, लेकिन स्वीकृत बजट का पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध इस्तेमाल सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। वित्तीय वर्ष की शेष अवधि को देखते हुए सरकार ने विभागों को निर्धारित लक्ष्यों पर तेजी से काम करने और धीमी परियोजनाओं की रफ्तार तत्काल बढ़ाने पर जोर दिया है।

