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वृंदावन में ब्रजरज उत्सव 2026 का आगाज, हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका ने दर्शकों को किया भावविभोर

वृंदावन में ब्रजरज उत्सव 2026 का आगाज, हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका ने दर्शकों को किया भावविभोर

वृंदावन में ब्रजरज उत्सव 2026 का आगाज, हेमा मालिनी की ‘गंगा’ नृत्य नाटिका ने दर्शकों को किया भावविभोर

वृंदावन।  ब्रज की कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को समर्पित ब्रजरज उत्सव 2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ शुक्रवार को वृंदावन स्थित नवनिर्मित स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में हुआ। उद्घाटन समारोह में सांसद और पद्मश्री सम्मानित हेमा मालिनी ने अपनी नृत्य नाटिका ‘गंगा’ के माध्यम से मां गंगा की महिमा, उनके पृथ्वी पर अवतरण और वर्तमान में नदियों के सामने खड़ी प्रदूषण की समस्या को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। तीन दर्जन से अधिक कलाकारों की सहभागिता वाली इस प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य, संगीत, अभिनय और आधुनिक मंच तकनीक का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम के माध्यम से गंगा और यमुना समेत देश की नदियों को स्वच्छ रखने तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण का संदेश दिया गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ सांस्कृतिक समारोह का शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिलें मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, सांसद तेजवीर सिंह, संत विजय कौशल महाराज, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गणेश वंदना के बाद हेमा मालिनी ने मां गंगा की भूमिका में मंच संभाला। उनकी प्रस्तुति ने पौराणिक कथाओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को नृत्य एवं संगीत के माध्यम से दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।

राजा भगीरथ की तपस्या और भगवान शिव की महिमा का मंचन

नृत्य नाटिका में गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा को प्रमुखता दी गई। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या, अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने का संकल्प और भगवान शिव द्वारा गंगा की तीव्र धारा को अपनी जटाओं में धारण करने के प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं, संगीत और नाटकीय दृश्यों ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ा। प्रस्तुति में गंगा के धार्मिक महत्व के साथ मानव जीवन और भारतीय सभ्यता में उनकी भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

चार युगों की यात्रा के साथ दिखाई गंगा की वर्तमान स्थिति

नृत्य नाटिका का विशेष आकर्षण गंगा की यात्रा को चार युगों के संदर्भ में प्रस्तुत करना रहा। पौराणिक प्रसंगों से लेकर भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़े दृश्यों तक, कार्यक्रम ने नदी की महत्ता को व्यापक रूप में दर्शाया। प्रस्तुति के अंतिम हिस्से में गंगा की मौजूदा स्थिति और बढ़ते प्रदूषण की समस्या को सामने रखा गया। दृश्यों के जरिए बताया गया कि जिस नदी को भारतीय परंपरा में जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है, वह मानवीय लापरवाही के कारण प्रदूषण की चुनौती से जूझ रही है। नृत्य नाटिका ने दर्शकों को नदियों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

 

 

ब्रजरज उत्सव को मिला विशिष्ट सांस्कृतिक आयाम

मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने ब्रजरज उत्सव को उत्तर भारत के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल बताते हुए कहा कि इस उत्सव ने अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका को आयोजन की प्रभावशाली शुरुआत बताया। सांसद तेजवीर सिंह ने ब्रज की कला और परंपराओं को संरक्षित करने में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने अतिथियों का आभार जताया और स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह के निर्माण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा सांसद हेमा मालिनी के योगदान का उल्लेख किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत विजय कौशल महाराज ने मां गंगा की महिमा का वर्णन किया।

कई संत और गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

समारोह में संत बलराम दास महाराज, संत गोविंदानंद तीर्थ, डॉ. आदित्यानंद महाराज, श्रीवत्स गोस्वामी, महंत सुंदर दास महाराज, विधायक पूरन प्रकाश, आगरा रेल मंडल के डीआरएम गगन गोयल और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

24 अक्टूबर से मथुरा में भी होंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

इस बार ब्रजरज उत्सव के कार्यक्रम मथुरा के साथ वृंदावन के नवनिर्मित स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में भी आयोजित किए जा रहे हैं। मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर 24 अक्टूबर से उत्सव की अन्य गतिविधियां शुरू होंगी। कार्यक्रम के तहत शनिवार को वंदनाश्री और ईशान मिश्रा की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए ब्रज की लोककला, संगीत और आध्यात्मिक विरासत को व्यापक मंच प्रदान किया जाएगा।

 

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