बलिया जिले में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए चल रहे कार्यों की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़ से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने का दावा कर रही है, वहीं बांसडीह तहसील क्षेत्र के महाराजपुर और चांदपुर गांवों में घाघरा नदी के किनारे चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों को लेकर लोगों में असंतोष दिखाई दे रहा है।
जनपद में गंगा और घाघरा नदी से प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए बाढ़ विभाग द्वारा नौ परियोजनाओं पर कार्य कराया जा रहा है। इसी क्रम में महाराजपुर और चांदपुर क्षेत्र में नदी कटान रोकने और गांवों की सुरक्षा के लिए पिचिंग एवं ठोकर निर्माण का कार्य चल रहा है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है और इसकी गुणवत्ता बेहद खराब है।
स्थानीय निवासीयों का कहना है कि वर्तमान निर्माण कार्य से गांव को कोई विशेष सुरक्षा नहीं मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिचिंग का कार्य कमजोर है और यह एक महीने भी नहीं टिक पाएगा। उन्होंने पूर्व में चांदपुर में करोड़ों रुपये की लागत से हुए कार्यों का हवाला देते हुए उसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए।
वहीं एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि कार्य में अनियमितता और लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि बाढ़ रोकने के लिए आवश्यक गहराई तक कार्य नहीं किया जा रहा है और कई स्थानों पर बोरियां सही तरीके से नहीं लगाई गई हैं। कुछ बोरियों की मिट्टी बह चुकी है और वे पानी में तैरती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि तकनीकी मानकों के अनुसार कार्य नहीं हुआ तो बाढ़ और कटान का खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

