Site icon UP की बात

10 हजार करोड़ से ज्यादा के बजट वाला नोएडा बारिश में बेहाल! नालों की बदहाली पर GM सत्य प्रकाश और CEO कृष्णा करुणेश की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

नोएडा में जल निकासी व्यवस्था पर सवाल

नोएडा में जल निकासी व्यवस्था पर सवाल

नोएडा। उत्तर प्रदेश का हाईटेक शहर नोएडा इन दिनों बारिश के बाद जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। जिस शहर को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी तरफ बारिश के मौसम में सड़कों पर भरा पानी, जाम पड़े नाले और बदबूदार जलभराव लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं।

नोएडा प्राधिकरण के GM सत्य प्रकाश और CEO कृष्णा करुणेश की जिम्मेदारी वाले शहर में सामने आई यह स्थिति अब प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे शहर के विकास और रखरखाव के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया जाता है, तो फिर बारिश में जल निकासी जैसी मूलभूत व्यवस्था क्यों प्रभावित हो जाती है?

 

10,000 करोड़ से ज्यादा का बजट, फिर भी नालों और सड़कों की हालत चिंताजनक

नोएडा प्राधिकरण का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट करीब 10,290 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। इस बड़े बजट में शहर के विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के लिए बड़ी धनराशि रखी गई है। लेकिन बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। शहर के कई हिस्सों में जलभराव, नालों में गंदगी और पानी निकासी की समस्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने बड़े बजट का जमीनी असर कहां दिखाई दे रहा है।

 

नालों की सफाई पर सवाल, बारिश आते ही सामने आई हकीकत

बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन मानसून की पहली बड़ी बारिश के बाद ही कई जगहों पर व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नज़र आई। नालों में जमा गाद, कचरा और खराब ड्रेनेज व्यवस्था के कारण पानी निकासी प्रभावित हुई। कई इलाकों में लोगों को गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ा। यह स्थिति सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंता का विषय बन गई है। रिहायशी इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को बीमारी फैलने का डर बना हुआ है।

 

 

GM सत्य प्रकाश सिंह और CEO कृष्णा करुणेश की कार्यप्रणाली पर उठ रही जवाबदेही की मांग

नोएडा प्राधिकरण में GM सत्य प्रकाश सिंह और CEO कृष्णा करुणेश शहर की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की निगरानी की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में जलभराव, नालों की सफाई और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं को लेकर अब उनकी कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिर भी नोएडा की कई सड़कें बदहाल स्थिति में हैं और लंबे समय से नालों की सफाई नहीं होने के कारण अब बारिश के दौरान पानी निकासी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। नाले गंदगी और सिल्ट से भरे पड़े हैं, जिसके चलते बरसात का पानी निकलने की जगह सड़कों और रिहायशी इलाकों में जमा हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि नोएडा जैसे हाईटेक शहर में पढ़े-लिखे और जागरूक परिवारों को भी बदबूदार पानी और गंदगी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। जलभराव के कारण घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

ऐसे में अब सवाल है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शहरों के विकास और सुविधाओं के लिए लगातार योजनाएं बनाई जा रही हैं और बड़ा बजट उपलब्ध कराया जा रहा है, तो फिर नोएडा में बुनियादी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं। लोगों का आरोप है कि जमीनी स्तर की परेशानियों और अधिकारियों की रिपोर्टिंग में बड़ा अंतर दिखाई देता है, क्योंकि कागजों में व्यवस्थाएं बेहतर दिखाई जाती हैं, जबकि हकीकत में जनता जलभराव और अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास कार्यों को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली और निगरानी में कमी के कारण योजनाओं का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब सवाल यह है कि नोएडा जैसे महत्वपूर्ण शहर में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी और लोगों को जलभराव जैसी समस्याओं से स्थायी राहत कब मिलेगी।

 

 

 

‘यूपी की बात’ ने जून में ही दिखाई थी नालों की सच्चाई

नोएडा में नालों की स्थिति और मानसून की तैयारियों को लेकर यूपी की बात चैनल पहले ही अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से मुद्दा उठा चुका है। जून महीने में चैनल ने दिखाया था कि कई इलाकों में नाले ओवरफ्लो होते दिखाई दिए और चीख-चीख कर मानो कह रहे हो कि GM सत्य प्रकाश आदेश दें दीजिए। ‘यूपी की बात’ ने ये भी कहा था यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है। अब बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें उसी समस्या की ओर इशारा कर रही हैं, जिसे लेकर पहले ही सवाल उठाए गए थे।

विकास के दावों के बीच जनता पूछ रही जवाब

नोएडा में विकास के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन शहर की मूलभूत सुविधाओं में कमी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है। जनता का सवाल है कि जब सरकार और प्राधिकरण विकास के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं, तो फिर नालों की सफाई, जल निकासी और बारिश से पहले की तैयारियों में कमी क्यों दिखाई देती है ? लोगों की मांग है कि सिर्फ कागजों और रिपोर्ट में नहीं, बल्कि जमीन पर भी व्यवस्थाएं बेहतर दिखाई देनी चाहिए।

 

अब देखना होगा, नोएडा प्राधिकरण क्या उठाता है कदम

मानसून का समय अभी बाकी है। आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने पर जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण के GM सत्य प्रकाश और CEO कृष्ण करुणेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना और लोगों को राहत पहुंचाना है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्राधिकरण इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या जिम्मेदारी तय की जाती है।

 

रिपोर्ट – निवेदिता 

Exit mobile version