Site icon UP की बात

नगर निगम और फूल का करार 2031 तक बढ़ा, 9 मंदिरों के फूलों के कचरे से बनेगी धूप और फ्लेदर

कानपुर : नगर निगम ने शहर के मंदिरों से निकलने वाले निर्माल्य के रीसाइक्लिंग का अनुबंध पांच साल के लिए और बढ़ा दिया है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय और कानपुर फ्लावर साइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड ‘फूल’ के संस्थापक अंकित अग्रवाल ने सोमवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब यह व्यवस्था नवंबर 2031 तक चलेगी।

निगम और फूल के बीच यह साझेदारी पहली बार नवंबर 2021 में शुरू हुई थी। इसके तहत आनंदेश्वर मंदिर और पनकी पंचमुखी हनुमान मंदिर सहित शहर के 9 प्रमुख मंदिरों से चढ़ाए गए फूल एकत्र किए जाते हैं। इन्हें फूल की रीसाइक्लिंग इकाई में ले जाकर चारकोल-मुक्त धूप, वर्मीकम्पोस्ट, गुलाल, प्राकृतिक रंग और फूलों के बायोमास से बना पशु-मुक्त चमड़ा ‘फ्लेदर’ बनाया जाता है।

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा, “कानपुर देश का पहला शहर था जिसने मंदिरों के फूल कचरे के संग्रह को औपचारिक रूप दिया। यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का आदर्श मॉडल है। इसमें सार्वजनिक खजाने पर बोझ नहीं है, पर्यावरण को लाभ है और केंद्र में समुदाय है। हम इस साझेदारी के दायरे में और मंदिरों को जोड़ने के लिए तैयार हैं।”

पिछले पांच वर्षों में इस व्यवस्था से गंगा और शहर की लैंडफिल साइटों से करीब 4500 मीट्रिक टन फूल कचरा डायवर्ट किया जा चुका है। इससे 800 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इनमें बड़ी संख्या हाशिए के समुदायों की महिलाओं और पहले कचरा बीनने वाले परिवारों की है।
फूल के संस्थापक अंकित अग्रवाल ने कहा, “फूल की शुरुआत कानपुर के घाटों से हुई थी। नगर निगम के सहयोग से यह प्रयोग अब एक स्थायी कार्यप्रणाली बन गया है। इस विस्तार से हमें संग्रह क्षमता और महिलाओं के कौशल विकास में और निवेश करने का भरोसा मिला है।”

फूल कंपनी कानपुर के अलावा वाराणसी, मथुरा और तिरुपति जैसे मंदिर शहरों में भी काम करती है। संस्था के अनुसार हर साल करीब 80 लाख टन फूल भारत की नदियों में पहुंच जाते हैं, जिनमें कीटनाशक और रंग के अवशेष होते हैं।
राजन साहू की रिपोर्ट

Exit mobile version