उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने जन भवन, लखनऊ से प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन बैठक कर ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में 2 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वर्चुअल संवाद तथा विश्वविद्यालयों की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की गई। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनकर जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बने।
एक करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य
बैठक में बताया गया कि 2 अगस्त को देशभर के लगभग 10 हजार स्थानों से एक करोड़ से अधिक युवा प्रधानमंत्री के वर्चुअल संवाद से जुड़ेंगे। इस दौरान युवा नशामुक्ति का संकल्प लेंगे और ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयंसेवक के रूप में अभियान का हिस्सा बनेंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों और संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से सम्मानित भी किया जाएगा।
हर रविवार होंगे जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रम
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि आगामी 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार नशामुक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इनमें वॉकाथन, योग, ध्यान, खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक गतिविधियां, नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता अभियान शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से युवाओं में सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा।
गोद लिए गांवों तक पहुंचे नशामुक्ति का संदेश
बैठक में विश्वविद्यालयों से कहा गया कि वे अपने गोद लिए गए गांवों में घर-घर जाकर नशामुक्ति अभियान चलाएं। राज्यपाल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय समाज के बीच पहुंचकर लोगों को जागरूक करेंगे तो इसका व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से परिवारों तक भी नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
नशामुक्त परिसर और बेहतर छात्रावास व्यवस्था पर जोर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसरों और छात्रावासों को पूरी तरह नशामुक्त बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के नियमित संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई छात्र नशे की गिरफ्त में न आए। साथ ही छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त वाई-फाई, फायर सेफ्टी और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया।
मियावाकी वन और कौशल विकास पर विशेष फोकस
बैठक में प्रत्येक विश्वविद्यालय को उपलब्ध भूमि के अनुसार एक से पांच एकड़ तक मियावाकी वन विकसित करने और व्यापक पौधरोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही कौशल विकास, स्वरोजगार, महिला उद्यमिता और पढ़ाई छोड़ चुके युवाओं को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बेसलाइन सर्वे और नियमित समीक्षा होगी
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि किसी भी अभियान की सफलता उसके परिणामों से तय होती है। इसलिए विश्वविद्यालय पहले बेसलाइन सर्वे करें और समय-समय पर समीक्षा कर यह आकलन करें कि अभियान से कितना सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि केवल भाषणों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार काम करने से ही नशामुक्त समाज का निर्माण संभव होगा।
विश्वविद्यालयों से सामाजिक बदलाव की अपेक्षा
बैठक में विश्वविद्यालयों ने 2 अगस्त से शुरू होने वाले अभियान और अगले 100 रविवारों तक प्रस्तावित गतिविधियों की कार्ययोजना प्रस्तुत की। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नशामुक्ति, कौशल विकास और जनजागरूकता के प्रभावी केंद्र भी बनने चाहिए।

