फर्रुखाबाद। मानसून की दस्तक से पहले फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने बाढ़ आपदा से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। गंगा और रामगंगा नदी के किनारे बसे गांवों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की।
जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने बताया कि जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 77 अतिसंवेदनशील और 112 संवेदनशील गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी तथा आपदा की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित किए जाएंगे।
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 52 बाढ़ चौकियां और 24 बाढ़ शरणालय स्थापित करने की योजना बनाई है। 15 जून के बाद सभी बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार 15 से 25 जून के बीच मानसून के पहुंचने की संभावना है, जिसके मद्देनजर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
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जिले में लगभग 68 किलोमीटर लंबा गंगा तटीय क्षेत्र है और हर वर्ष 300 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं। कई इलाकों में बाढ़ के साथ-साथ कटान की समस्या भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है, जिससे लोगों की आजीविका और आवास दोनों पर खतरा बना रहता है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार सदर तहसील के 37, कायमगंज के 113 और अमृतपुर के 172 गांव बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। इन्हीं क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए राहत और बचाव की विशेष रणनीति तैयार की गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सदर तहसील में 5, कायमगंज में 6 और अमृतपुर में 13 बाढ़ शरणालय बनाए जाएंगे। वहीं बाढ़ चौकियों की बात करें तो सदर में 4, कायमगंज में 15 और अमृतपुर में 33 चौकियां स्थापित की जाएंगी।
राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रशासन ने बड़ी संख्या में नावों और नाविकों की व्यवस्था की है। जिलाधिकारी के अनुसार सदर क्षेत्र में 30, कायमगंज में 54 और अमृतपुर में 107 नावों एवं नाविकों की तैनाती की जाएगी। कुल मिलाकर 191 नावें राहत कार्यों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
इसके अलावा आपात परिस्थितियों में बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सदर में 5, कायमगंज में 28 और अमृतपुर में 20 गोताखोर तैनात किए जाएंगे। कुल 53 प्रशिक्षित गोताखोर संभावित आपदा की स्थिति में राहत कार्यों में सहयोग करेंगे।
जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी संभावित बाढ़ संकट से पहले सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना है, ताकि जनहानि और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
मानसून से पहले की गई यह तैयारी प्रशासन की आपदा प्रबंधन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। अब सभी की नजरें मानसून की गतिविधियों और प्रशासन की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा पर टिकी हैं।

