ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट और शाहबेरी क्षेत्र में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में करीब 756 करोड़ रुपये की लागत वाले डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। परियोजना का उद्देश्य शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
सिंगल एलिवेटेड रोड की जगह क्यों चुना गया डबल-डेकर मॉडल?
शाहबेरी क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई और आसपास का घना विकास परियोजना के लिए बड़ी चुनौती है। पहले यहां सिंगल एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन तकनीकी अध्ययन में उपलब्ध जगह को पारंपरिक चार लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए पर्याप्त नहीं पाया गया। इसके बाद डबल-डेकर संरचना का विकल्प सामने आया। प्रस्ताव के मुताबिक दोनों डेक पर अलग-अलग दिशाओं का यातायात संचालित किया जाएगा, जिससे सीमित जगह में अधिक ट्रैफिक को व्यवस्थित करने की कोशिश होगी।
पहले चरण में 2.5 किलोमीटर का कॉरिडोर
बोर्ड ने पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति चौक तक करीब 2.5 किलोमीटर के डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इसकी अनुमानित लागत ₹756.01 करोड़ बताई गई है। आगे के हिस्से को दूसरे चरण में विकसित करने की योजना है।
कई इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा
परियोजना पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी, क्रॉसिंग रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बीच आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं विकसित होने के कारण रोजाना भारी यातायात दबाव रहता है। परियोजना के निर्माण में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की भूमिका भी प्रस्तावित है। लागत को संबंधित विकास प्राधिकरणों के बीच साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ट्रैफिक जाम से राहत की उम्मीद
शाहबेरी मार्ग पर अक्सर यातायात दबाव की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में डबल-डेकर कॉरिडोर को क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक राहत निर्माण पूरा होने और यातायात संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

