उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लोगों से आगे आने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाण्डुलिपियां भारत की आत्मा का महत्वपूर्ण अध्याय हैं और पीढ़ियों से संचित ज्ञान को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा माध्यम भी।
सीएम योगी ने कहा कि हजारों वर्षों से पाण्डुलिपियां ज्ञान और चेतना को जाग्रत करती रही हैं। आज देश और समाज को जो प्राचीन ज्ञान, संस्कृति और इतिहास उपलब्ध है, वह इन दुर्लभ पाण्डुलिपियों के कारण ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल कागज या ताड़पत्र नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य खजाना हैं।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पाण्डुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ, ताड़पत्र या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनकी जानकारी सरकार तक अवश्य पहुंचाएं ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है और यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों से ‘ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप’ और पोर्टल के माध्यम से इन पाण्डुलिपियों की जानकारी अपलोड करने की अपील की। उनका कहना है कि तकनीक के माध्यम से देश की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य और अध्यात्म से जुड़ी अनगिनत जानकारियां इन पाण्डुलिपियों में सुरक्षित हैं। इसलिए इनका संरक्षण केवल इतिहास बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का भी प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पाण्डुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। लोगों की भागीदारी से इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी विरासत को पहचानें और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

