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सूरजपुर कोर्ट में नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कानूनी बढ़त, स्टे को आगे बढ़ाने का अंतिम अवसर

सूरजपुर कोर्ट में नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कानूनी बढ़त, स्टे को आगे बढ़ाने का अंतिम अवसर

सूरजपुर कोर्ट में नोएडा प्राधिकरण की बड़ी कानूनी बढ़त, स्टे को आगे बढ़ाने का अंतिम अवसर

सूरजपुर (गौतमबुद्ध नगर)। सूरजपुर स्थित न्यायालय में नोएडा प्राधिकरण से जुड़े एक भूमि विवाद मामले में प्राधिकरण को अहम कानूनी सफलता मिलने का दावा किया गया है। सिविल वाद संख्या 1348/2023 में सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले से लागू अस्थायी निषेधाज्ञा को आगे बढ़ाने के लिए वादी पक्ष को अंतिम अवसर दिया है। अगली सुनवाई में स्टे जारी रहने पर अदालत के निर्णय की स्थिति स्पष्ट होगी।

55 बीघा भूमि से जुड़ा है मामला

मामला ग्राम सोरखा जाहिदाबाद स्थित खसरा संख्या 18 से जुड़ा बताया गया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विवादित भूमि का कुल रकबा करीब 55 बीघा है। प्रकरण अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) तृतीय, गौतमबुद्ध नगर की अदालत में विचाराधीन है। इस मामले में चतर पाल यादव की ओर से वाद दायर किया गया है, जबकि नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा प्राधिकरण) समेत अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।

 

स्टे की आड़ में निर्माण के प्रयास का आरोप

प्राधिकरण की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संदीप सिंह चौहान ने अदालत के समक्ष कथित तौर पर यह मुद्दा उठाया कि स्थगन आदेश का सहारा लेकर विवादित भूमि पर अवैध गतिविधियों और निर्माण की कोशिश की जा रही थी। प्राधिकरण की ओर से अदालत में संबंधित तथ्यों और कानूनी तर्कों को रखा गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अस्थायी निषेधाज्ञा को आगे बढ़ाने के लिए वादी पक्ष को अंतिम अवसर प्रदान किया।

 

अगली सुनवाई पर तय होगी स्टे की स्थिति

10 सितंबर 2026 को पारित आदेश के बाद अब मामले की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि अगली तारीख पर मौजूदा स्थगन आदेश समाप्त या खारिज होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम स्थिति न्यायालय के आगामी आदेश से ही स्पष्ट होगी।

प्राधिकरण की जमीन की सुरक्षा पर जोर

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य विधि सलाहकार वीके सिंह ने कहा कि प्राधिकरण की भूमि, संपत्तियों और सार्वजनिक हितों की सुरक्षा के लिए कानूनी स्तर पर प्रभावी पैरवी और आवश्यक कार्रवाई जारी रखी जाएगी। प्राधिकरण की ओर से मामले में अदालत के समक्ष रखे गए तर्कों और साक्ष्यों को भूमि की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

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