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उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग पर सरकार का बड़ा फोकस, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को दिए अहम निर्देश

उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग पर सरकार का बड़ा फोकस, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को दिए अहम निर्देश

उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग पर सरकार का बड़ा फोकस, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागों को दिए अहम निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उपचारित जल (Treated Water) के सुरक्षित पुनः उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।

विभागों को उपविधियों में संशोधन करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने उपविधियों में आवश्यक संशोधन कर उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग से जुड़े प्रावधान शामिल करें। साथ ही प्रत्येक विभाग अपनी पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से लागू करे।

एसटीपी और मांग केंद्रों का होगा जीआईएस मैपिंग

बैठक में सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और उपचारित जल की मांग वाले केंद्रों का जीआईएस आधारित मानचित्रण कराने पर जोर दिया गया। इससे जल आपूर्ति और उपयोग की बेहतर योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।

17 नगर निगमों के लिए बनेगी पुनः उपयोग कार्ययोजना

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) से प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर पर उपचारित जल पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध करने के निर्देश दिए। इसके अलावा राज्य के विभागों को इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव भेजने के लिए भी कहा गया।

राज्य और जिला स्तर पर गठित होंगी समितियां

बैठक में नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति, तकनीकी समिति और मूल्य निर्धारण समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं जिला स्तर पर पुनः उपयोग समिति और विवाद समाधान समिति बनाने पर भी सहमति बनी।

उद्योगों और संस्थानों में बढ़ेगा उपचारित जल का उपयोग

मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि रेलवे, सड़क परिवहन, कृषि, ऊर्जा, विमानन और आवास जैसे विभिन्न मंत्रालयों को भी उपचारित जल के द्वितीयक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और मात्रा दोनों के लिहाज से विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है, जिससे हितधारकों का विश्वास बढ़े।

नोएडा, मथुरा और वाराणसी के मॉडल किए गए साझा

बैठक में नोएडा, मथुरा, वाराणसी और प्रयागराज में उपचारित जल के पुनः उपयोग से जुड़े सफल उदाहरण प्रस्तुत किए गए। नोएडा में प्रतिदिन उपलब्ध 260 एमएलडी उपचारित जल में से 120 एमएलडी का पुनः उपयोग किया जा रहा है, जबकि शेष जल हिंडन नदी में प्रवाहित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में उपयोग किया जा रहा है।

 

पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क को मिलेगा उपचारित जल

बैठक में बताया गया कि लखनऊ और वाराणसी में प्रस्तावित पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्कों के लिए उपचारित जल उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है। इससे उद्योगों में स्वच्छ जल की खपत कम होगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

निगरानी व्यवस्था होगी और अधिक मजबूत

मुख्य सचिव ने कहा कि उपचारित जल की गुणवत्ता और आपूर्ति की नियमित निगरानी के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा। गंगा पल्स पोर्टल के माध्यम से एसटीपी की गुणवत्ता पर रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे आवश्यकतानुसार जल आपूर्ति पर त्वरित निर्णय लिया जा सकेगा।

विभागीय समन्वय पर दिया गया विशेष जोर

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग की नीति का सफल क्रियान्वयन जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

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