उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षोत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पाँच ग्राम विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
भाषण, कहानी और चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को किया सम्मानित
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया। भाषण, कहानी और चित्रकला प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को राज्यपाल ने पुरस्कार प्रदान करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास की सराहना
राज्यपाल ने कहा कि कम उम्र में बच्चों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति और रचनात्मक सोच प्रेरणादायक है। उन्होंने शिक्षकों के प्रयासों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रतिभाओं की समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन से विद्यार्थी भविष्य में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं।
चित्रकला और कहानी लेखन को बताया व्यक्तित्व विकास का माध्यम
चित्रकला प्रतियोगिता में प्रस्तुत कलाकृतियों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कला विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच विकसित करती है। उन्होंने विश्वविद्यालय से ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किया। कहानी प्रतियोगिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों ने मौलिक और प्रेरणादायक रचनाएं प्रस्तुत की हैं, जो प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों के समर्पण को दर्शाती हैं।
विद्यार्थियों की कहानियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने के निर्देश
राज्यपाल ने जन भवन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतियोगिता में प्रस्तुत सभी कहानियों का संकलन कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रेरणादायक कहानियों को विद्यालयों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इनसे प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
पर्यावरण संरक्षण पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता मन
समारोह के दौरान स्कूली बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण विषय पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर राज्यपाल ने उनकी सराहना की और उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों का विकास भी विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण के लिए आवश्यक है।

