सिर्फ एक इंच जमीन पर हुआ था कर्ण का अंतिम संस्कार, जानिए कैसे?

कर्ण-अर्जुन का युद्ध

महाभारत के कर्ण का किरदार आज भी लोगों के जहन में है, कर्ण और अर्जुन में भयंकर युद्ध हुआ था, जिसमें अर्जुन विजयी हुए थे। जबकि उस समय के वे दोनों सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे।

कर्ण की अंतिम इच्छा

कर्ण ने अपने मृत्यु से पहले यह इच्छा जाहिर की थी कि उनका अंतिम संस्कार ऐसी जमीन पर हो, जहां पर उस समय तक किसी का भी अंतिम संस्कार न हुआ हो।

जमीन खोजने निकले कृष्ण

कर्ण की जब मृत्यु हुई तो श्री कृष्ण उनकी इच्छा अनुसार जमीन खोजने निकले, लेकिन पूरी पृथ्वी पर भूमि को कोई ऐसा टुकड़ा नहीं मिला, जहाँ उसके किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं हुआ हो।

एक इंच जमीन पर

सिर्फ सूरत में ताप्ती नदी के किनारे एक इंच भूमि ऐसी मिली, जहां उसके पहले कभी किसी का शवदाह नहीं हुआ था। फिर यहाँ श्री कृष्ण ने एक बाण रखा और उसी पर लिटाकर कर्ण का अंतिम संस्कार किया गया।

सूरत में हैं यह स्थान

सूरत शहर में यह स्थान अब 'तुल्सीबड़ी मंदिर' के रूप में जाना जाता है, जिसको लेकर आसपास के लोगों में बड़ी श्रद्धा है। इसी के पास ही बागनाथ मंदिर भी है।

बर का मंदिर

यहां तीन पत्ता बर का मंदिर है। जहां बरगद का एक पेड़ भी है, जिसके बारे में यह मान्यता है कि इसकी उम्र हजारों साल की है, लेकिन इसमें आजतक केवल तीन ही पत्ते आए हैं।

पेड़ में केवल तीन पत्ते

मान्यता है कि तीनों पत्ते ब्रम्हा, विष्णु और महेश हैं। ये तीनों ही पत्ते सदाबहार बने रहते हैं। ये आज भी हरे भरे हैं, लेकिन इसमें कभी कोई नया पत्ता अंकुरित नहीं होता है।

यह पोस्ट धार्मिक भावनाओं और धार्मिक क्रियाकलापों  के आधार पर लिखा गया है "यूपी की बात" न्यूज़ चैनल इस जानकारी की पुष्टि और जिम्मेदारी नहीं लेता है। 

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