उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 29 जुलाई को अपने कार्यकाल के सात वर्ष पूरे कर लिए। 29 जुलाई 2019 को राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद से उन्होंने विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर उनके वक्तव्य समय-समय पर चर्चा का विषय रहे हैं। सात वर्षों का कार्यकाल पूरा करने के साथ ही वह उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल रहने वाली शख्सियत बन गई हैं।
ब्रिटिश काल का रिकॉर्ड भी किया पीछे
आनंदीबेन पटेल ने अपने सात वर्षीय कार्यकाल के साथ ब्रिटिश शासनकाल के राज्यपाल सर मौरिस गार्नर हैलट का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है। हैलट ने तत्कालीन संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के राज्यपाल के रूप में छह वर्षों तक सेवा दी थी। आनंदीबेन पटेल प्रदेश की दूसरी महिला राज्यपाल हैं। उनसे पहले स्वतंत्र भारत में सरोजिनी नायडू संयुक्त प्रांत की पहली महिला राज्यपाल बनी थीं और उन्होंने 1947 से 1949 तक यह दायित्व निभाया था।
राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से समृद्ध रहा सफर
आनंदीबेन पटेल का सार्वजनिक जीवन शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। वह गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और इसके अलावा मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ की राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में राज्यपाल बनने के बाद उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने, टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसे कई जनकल्याणकारी अभियानों को प्राथमिकता दी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए। 22 जुलाई 2026 तक उनकी पहल पर 67,643 आंगनवाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं, जबकि 1,53,997 एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अलावा चार लाख से अधिक तपेदिक (टीबी) मरीजों के उपचार में भी सहयोग प्रदान किया गया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए उत्तर प्रदेश के 18 राज्य विश्वविद्यालयों ने एनएएसी मूल्यांकन में ए++ और ए+ रैंकिंग हासिल की, जिसे राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

