उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) संजय प्रसाद शुक्रवार को छह महत्वपूर्ण विभागों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों, घोषणाओं और विकास कार्यों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। बैठक का उद्देश्य विभागों में लंबित कार्यों को गति देना और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
कौन हैं संजय प्रसाद और क्यों है यह बैठक अहम?
अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) के रूप में संजय प्रसाद मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं, विकास परियोजनाओं और विभागों को दिए गए निर्देशों की नियमित मॉनिटरिंग करना है। वे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, प्रशासनिक सुधार और लंबित मामलों की समीक्षा करते हैं। ऐसे में उनकी अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों को शासन स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इन विभागों के कामकाज की होगी समीक्षा
बैठक में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग, नगर विकास विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग तथा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इन विभागों में चल रही योजनाओं, विकास कार्यों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुपालन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी।
बजट और विकास परियोजनाओं का होगा मूल्यांकन
समीक्षा बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान, जारी की गई वित्तीय स्वीकृतियों और विकास कार्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत बजट, उसके उपयोग और विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा होगी।
भर्ती प्रक्रिया और रिक्त पदों पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की स्थिति और भर्ती प्रक्रिया भी है। चयन आयोगों को भेजे गए अधियाचन, भर्ती नियमावली के पुनरीक्षण तथा नियुक्तियों की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, ताकि रिक्त पदों को जल्द भरने की दिशा में निर्णय लिए जा सकें।
50 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की होगी समीक्षा
बैठक में 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माण परियोजनाओं की प्रगति, उनकी वित्तीय स्थिति और समयसीमा की भी समीक्षा होगी। साथ ही जिन परियोजनाओं का लोकार्पण या शिलान्यास प्रस्तावित है, उनकी तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
लंबित स्वीकृतियों पर भी होगी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई विभागों में कार्ययोजनाओं की स्वीकृतियां अभी लंबित हैं, जिससे विकास परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। समीक्षा बैठक में इन लंबित मामलों पर भी विचार किया जाएगा और विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
बैठक के नतीजों पर रहेगी नजर
शासन स्तर पर इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि समीक्षा के बाद लंबित योजनाओं की स्वीकृति, भर्ती प्रक्रिया और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी तेजी आती है तथा मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन को लेकर विभाग कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।

