उत्तर प्रदेश के नोएडा में करीब डेढ़ साल से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हजारों फ्लैट खरीदारों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। Noida Authority ने 21 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्टों के बिल्डरों को डिफॉल्टर घोषित करते हुए रजिस्ट्री के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने पर रोक लगा दी है। इस फैसले से करीब 8 हजार फ्लैट बायर्स की रजिस्ट्री प्रभावित हुई है।
बकाया भुगतान न होने पर बिल्डरों को नोटिस
अथॉरिटी ने संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि तय शेड्यूल के अनुसार बकाया किस्त जमा किए बिना न तो रजिस्ट्री की एनओसी दी जाएगी और न ही किसी अन्य नीतिगत लाभ का फायदा मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, इन 21 प्रॉजेक्टों में से लगभग 4500 फ्लैटों के लिए पहले ही एनओसी जारी की जा चुकी थी, जबकि शेष करीब 3 हजार फ्लैटों की रजिस्ट्री अब रोक दी गई है।
अमिताभ कांत पॉलिसी से मिली थी राहत की उम्मीद
प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार की Amitabh Kant पॉलिसी को संशोधन के साथ उत्तर प्रदेश में लागू किया था। इस नीति का उद्देश्य 14-15 वर्षों से अधूरे पड़े बिल्डर प्रॉजेक्टों को पुनर्जीवित करना और फ्लैट बायर्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ करना था। नोएडा के कुल 57 प्रॉजेक्ट इस पॉलिसी के दायरे में आए थे, जिनमें से 36 बिल्डरों ने अथॉरिटी के साथ बकाया भुगतान को लेकर समझौता किया था।
25 प्रतिशत जमा, 75 प्रतिशत में चूक
समझौते के तहत 25 प्रतिशत बकाया राशि जमा करने पर रजिस्ट्री की एनओसी जारी की जानी थी, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि तय समयसीमा में जमा करनी थी। हालांकि, 36 में से 21 प्रॉजेक्टों के बिल्डर 25 प्रतिशत राशि जमा करने के बाद बाकी भुगतान समय पर नहीं कर पाए। इसके चलते अथॉरिटी ने इन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया।
1200 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया
अथॉरिटी अधिकारियों के अनुसार, इन 21 प्रॉजेक्टों पर करीब 1200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। अब तक लगभग 257 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं। 25 प्रतिशत राशि जमा होने के बाद करीब 4500 फ्लैटों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी दी गई थी, लेकिन शेष बकाया न मिलने के कारण बाकी फ्लैटों की रजिस्ट्री फिलहाल रोक दी गई है। ग्रुप हाउसिंग के ओएसडी क्रांति शेखर ने स्पष्ट किया कि जब तक बिल्डर तय शेड्यूल के अनुसार शेष 75 प्रतिशत राशि जमा नहीं करेंगे, तब तक एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
इन सेक्टरों के प्रॉजेक्टों पर पड़ा असर
इस फैसले का असर सेक्टर-137, 78, 108, 143, 76, 168, 61, 45, 93बी, 75, 107, 50, 70 और 77 सहित कई सेक्टरों के ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्टों पर पड़ा है। प्रभावित बिल्डरों में इम्पीरियल हाउसिंग, नेक्सजेन इफाकॉन, लॉरिएट बिल्डवेल, गुलशन होम्स, स्काईटेक कंस्ट्रक्शन, सनवर्ल्ड रेजीडेंसी, गार्डेनिया शेल्टर्स, जेएम हाउसिंग, प्रतीक बिल्डटेक, ओमेक्स ग्रुप सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं।
फ्लैट बायर्स की बढ़ी चिंता
करीब डेढ़ साल से रजिस्ट्री की उम्मीद लगाए बैठे फ्लैट बायर्स का कहना है कि उन्होंने फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी है, लेकिन बिल्डरों और अथॉरिटी के बीच वित्तीय विवाद का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। खरीदारों में इस फैसले के बाद चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।

