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नोएडा के सोरखा जाहिदाबाद में 9.82 करोड़ से बन रहा पुष्कणीर तालाब, 50% काम पूरा

नोएडा के पूर्वी हिस्से और एफएनजी एक्सप्रेसवे के नजदीक स्थित ग्राम सोरखा जाहिदाबाद में जल संरक्षण और पर्यावरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। गांव में करीब 9 करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से पुष्कणीर तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और निर्माण की मौजूदा गति को देखते हुए अगले चार महीने में इसके पूरा होने का अनुमान है। पुष्कणीर तालाब परियोजना का उद्देश्य केवल एक जलाशय तैयार करना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पर्यावरण सुधार को बढ़ावा देना भी है। परियोजना के तहत तालाब के निर्माण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप कराया जा रहा है।

तालाब के तैयार होने के बाद सोरखा जाहिदाबाद और आसपास के क्षेत्र को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी को संरक्षित करने में यह तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोकने के साथ ही भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी। भूजल पुनर्भरण होने से आने वाले समय में क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में भी योगदान मिल सकता है।परियोजना से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। तालाब के आसपास हरियाली विकसित होने से क्षेत्र का वातावरण बेहतर होगा और स्थानीय स्तर पर एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल भी तैयार हो सकेगा। इससे ग्रामीणों को घूमने-फिरने और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मिलने की उम्मीद है।

गांवों के विकास में सड़क, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत सोरखा जाहिदाबाद में पुष्कणीर तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 9.82 करोड़ रुपये की यह परियोजना भविष्य में क्षेत्र के जल प्रबंधन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और करीब आधा काम पूरा हो चुका है। यदि निर्धारित समय के अनुसार परियोजना पूरी होती है तो अगले चार महीने में ग्रामीणों को इसका लाभ मिलना शुरू हो सकता है। पुष्कणीर तालाब आने वाले समय में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण सुधार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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