नोएडा: यमुना नदी में पहुंचने वाले प्रदूषित पानी को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से सीवेज ट्रीटमेंट को मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहर के विभिन्न नालों से निकलने वाले पानी को ट्रीट करने के बाद ही नदी की ओर भेजने पर जोर रहेगा।
नालों पर लगाए जाएंगे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
योजना के तहत कुल 24 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जाने की बात सामने आई है। इनमें से कुछ परियोजनाओं पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, जबकि अन्य प्रस्तावित प्लांट के लिए डीपीआर और तकनीकी स्तर पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रस्तावित परियोजनाओं में पांच STP की डीपीआर तैयार हो चुकी है और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। इन परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
2027 और 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
योजना के तहत कुछ STP को दिसंबर 2027 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अन्य प्रस्तावित प्लांट को दिसंबर 2028 तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा यमुना में प्रदूषण का भार कम करने के लिए फाइको-फाइको तकनीक आधारित तीन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का भी प्रस्ताव बताया गया है।
COD और BOD जैसे प्रदूषकों पर रहेगा फोकस
नोएडा क्षेत्र में यमुना का प्रवाह करीब 17 किलोमीटर तक है। शहर के विभिन्न नालों का पानी कोंडली नाले के माध्यम से यमुना तक पहुंचता है। नए STP के जरिए सीवेज को उपचारित कर COD और BOD जैसे प्रदूषण मानकों को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाएगा। यमुना की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी यमुना बेसिन में सीवेज उपचार से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और विभिन्न एजेंसियों की योजनाओं में नए STP और विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम को शामिल किया गया है।
सीवेज को नदी तक पहुंचने से पहले रोकने की कवायद
प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नालों के जरिए यमुना तक पहुंचने वाले प्रदूषित पानी का उपचार करना है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट के साथ जल निकासी और ट्रीट किए गए पानी के उचित प्रवाह की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। यमुना प्रदूषण से जुड़े हालिया मामलों में उपचारित और बिना उपचारित पानी के मिश्रण को रोकने पर भी जोर दिया गया है।

