उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई रफ्तार देते हुए विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़े गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। प्रयागराज से सोनभद्र तक प्रस्तावित यह लगभग 330 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे न केवल पूर्वांचल की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को चार प्रमुख राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड—की सीमाओं से भी जोड़ेगा।
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका गंगा एक्सप्रेसवे से लिंक होना है। गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले यात्रियों को प्रयागराज के सोरांव तहसील के जुड़ापुर दांदू गांव में विंध्य एक्सप्रेसवे का सीधा कनेक्शन मिलेगा। यह वही स्थान है जहां गंगा एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर स्थित है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई से किया था। इस लिंक के बनने से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी।
विंध्य एक्सप्रेसवे का मार्ग प्रयागराज की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों से होकर मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इसके निर्माण के लिए कुल 84 गांवों की जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जिनमें सोरांव के 29, फूलपुर के 24 और हंडिया के 31 गांव शामिल हैं। जिला प्रशासन ने इन गांवों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है और अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी जारी है।
यह एक्सप्रेसवे न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि व्यापार, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति देगा। विशेष रूप से सोनभद्र, जो खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है, को बड़े बाजारों से सीधा संपर्क मिलेगा। इसके साथ ही धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाने वाली साबित हो सकती है।

