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PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त, नोएडा लीजबैक प्रकरण में यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई

PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त, नोएडा लीजबैक प्रकरण में यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई

PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त, नोएडा लीजबैक प्रकरण में यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र (1997 बैच) के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई नोएडा विकास प्राधिकरण में उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए कथित बड़े लीजबैक और भूमि आवंटन प्रकरण से जुड़ी विभागीय जांच के बाद की गई है।

नोएडा प्राधिकरण में सचिव रहते हुए हुई थी कार्रवाई

हरीश चंद्र वर्ष 2011 में नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। इसी दौरान ग्राम शहदरा से संबंधित सेक्टर 140-ए, 141, 142 और 143 में आने वाली करीब 3,81,527 वर्ग मीटर अर्जित भूमि के लीजबैक को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। आरोप के मुताबिक, जिन भूमि पर लीजबैक की सुविधा दी गई, उसमें नियमों का पालन नहीं किया गया और पात्र स्थानीय किसानों के बजाय बाहरी लोगों तथा निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।

किसानों के लिए निर्धारित थी लीजबैक की सुविधा

विभागीय जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया कि संबंधित नियमों के तहत लीजबैक की सुविधा स्थानीय गांव के पात्र किसानों के लिए निर्धारित थी। इसमें एक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्ग मीटर भूमि का प्रावधान बताया गया था। इसके बावजूद कई मामलों में नियमों से अलग जाकर बड़े भूखंड आवंटित किए जाने का आरोप लगा। जांच के अनुसार, कुछ निजी कंपनियों को 15,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखंड दिए गए।

हजारों करोड़ रुपये की भूमि से जुड़ा मामला

इस पूरे प्रकरण में लीजबैक की गई भूमि की अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹3,800 करोड़ से ₹4,000 करोड़ बताई गई है। इसी वजह से यह मामला उत्तर प्रदेश के चर्चित भूमि और लीजबैक विवादों में शामिल रहा। हालांकि, भूमि की बाजार कीमत और कथित वित्तीय नुकसान से संबंधित आंकड़े अलग-अलग स्तरों पर अलग तरीके से बताए जाते रहे हैं।

2013 से चल रही थी विभागीय कार्रवाई

हरीश चंद्र के खिलाफ इस मामले में वर्ष 2013 से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की बात सामने आई है। प्रकरण की विभागीय जांच के दौरान नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रितु माहेश्वरी की भूमिका भी जांच प्रक्रिया से जुड़ी रही। लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की मंजूरी प्राप्त होने के बाद सरकार की ओर से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया।

 

वर्तमान में कोलकाता में थे तैनात

बर्खास्तगी से पहले हरीश चंद्र पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। वह 1997 बैच के वरिष्ठ PCS अधिकारियों में शामिल थे।

IAS में प्रमोशन पर भी पड़ा था असर

बताया जाता है कि नोएडा लीजबैक प्रकरण से जुड़ी विभागीय जांच के कारण हरीश चंद्र के IAS कैडर में पदोन्नति का मामला भी प्रभावित हुआ था। जांच लंबित रहने के कारण उनका प्रमोशन आगे नहीं बढ़ सका।

सरकार ने जारी किया बर्खास्तगी आदेश

प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से हरीश चंद्र की सेवा समाप्ति का आदेश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार की इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

 

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