श्रावण मास के शुभारंभ पर वृंदावन स्थित प्रियाकान्तजु मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने ब्रज की पावन मिट्टी से लगभग 1.11 लाख पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से उनका पूजन और रुद्राभिषेक किया। यह आयोजन 21 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महाशिवपुराण कथा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
मंत्रोच्चार के बीच हुआ पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक
श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ पंचामृत, बेलपत्र, फल और पवित्र जल से पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक किया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर हर महादेव’ के जयघोष और शिव भक्ति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में भक्तों ने विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना के साथ पूजा-अर्चना की।
इंद्रेष जी ने दिया प्रेम और सद्भाव का संदेश
महाशिवपुराण कथा से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेष जी, प्रचारक रूपेश जी, डॉ. दयालु महाराज एवं अन्य अतिथियों ने व्यासपीठ का पूजन किया। अपने संबोधन में इंद्रेष जी ने कहा कि भगवान शिव सृष्टि के आदि और अंत दोनों हैं तथा उनका स्वरूप प्रेम और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी से प्रेम करना या दूरी बनाए रखना व्यक्ति का निर्णय हो सकता है, लेकिन किसी के प्रति नफरत नहीं रखनी चाहिए। उनके अनुसार प्रेम मानवता की पहचान है, जबकि घृणा विनाश का मार्ग प्रशस्त करती है।
देवकीनंदन महाराज ने बताया शिव का न्याय सिद्धांत
कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने कहा कि भगवान शिव न्याय के देवता हैं और प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों और आचरण के अनुसार फल प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सद्गुणों को अपनाकर ही सच्चे अर्थों में शिव कृपा प्राप्त की जा सकती है। साथ ही उन्होंने बताया कि भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से जागृत करता है और उसे सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
विश्व शांति के लिए किया गया रुद्राभिषेक
श्रावण मास के प्रथम दिन देवकीनंदन महाराज और इंद्रेष जी ने संयुक्त रूप से भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर विश्व शांति, समाज में सद्भाव और मानव कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
शनिवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल होंगी शामिल
मंदिर प्रशासन के अनुसार उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शनिवार को प्रियाकान्तजु मंदिर पहुंचेंगी। वे पार्थिव शिवलिंग पूजन, रुद्राभिषेक और महाशिवपुराण कथा में सहभागिता करेंगी। इसके साथ ही विभिन्न सेवा कार्यों में भाग लेने के बाद शिवमहापुराण कथा का श्रवण भी करेंगी।

