Site icon UP की बात

गांधी-शास्त्री जयंती पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दी श्रद्धांजलि, स्वच्छता को कार्यसंस्कृति बनाने पर जोर

गांधी-शास्त्री जयंती पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दी श्रद्धांजलि, स्वच्छता को कार्यसंस्कृति बनाने पर जोर

गांधी-शास्त्री जयंती पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दी श्रद्धांजलि, स्वच्छता को कार्यसंस्कृति बनाने पर जोर

लखनऊ।  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनके जीवन और विचारों को याद किया। कार्यक्रम के दौरान जन भवन में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गांधीजी के प्रिय भजन

कार्यक्रम में जन भवन आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने गांधीजी के प्रिय भजनों और सर्वधर्म प्रार्थना का सामूहिक गायन किया। विद्यार्थियों ने ‘रघुपति राघव राजाराम’, ‘ॐ तत्सत’, ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ और ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’ की प्रस्तुति दी। राज्यपाल ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।

गांधी और शास्त्री के जीवन से सीख लेने की अपील

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि गांधी और शास्त्री का जीवन सत्य, सादगी, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भजन के मूल भाव को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करने तथा निर्धारित मूल्यों के अनुरूप कार्य करने का संकल्प लेने की अपील की।

स्वच्छता को रोजमर्रा की कार्यशैली से जोड़ने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छता किसी एक अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे कार्यालय की नियमित कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यस्थलों की साफ-सफाई, फाइलों के समय पर निस्तारण और कार्यालय से निकलने वाले कचरे के उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण कर स्वच्छता और कार्यव्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। राज्यपाल ने टीम भावना के साथ योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया।

 

कर्मचारियों के बीच टीम भावना बढ़ाने की पहल

राज्यपाल ने जन भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पहले आयोजित साइकिल यात्रा का उल्लेख करते हुए ऐसी गतिविधियों को दोबारा आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सहयोग और सहज संवाद का वातावरण होना चाहिए।

बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता पर विशेष ध्यान

राज्यपाल ने जन भवन आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उनकी रचनात्मकता, लेखन, अभिव्यक्ति, निरीक्षण क्षमता और अन्य कौशल विकसित करने के अवसर दिए जाने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने पर ध्यान देने को कहा।

शैक्षिक भ्रमण और अनुभव लेखन को बढ़ावा देने की बात

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शैक्षिक भ्रमण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जन भवन विद्यालय के बच्चों को पहले अयोध्या और वाटर पार्क का भ्रमण कराया गया था। भ्रमण के बाद विद्यार्थियों ने अपने अनुभव लिखे, जिन्हें संकलित कर पुस्तक का रूप दिया गया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए बच्चों को इसी तरह के रचनात्मक कार्यों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

गांधी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर जोर

राज्यपाल ने गुजरात में शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए गांधीजी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और शिक्षा का केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों और आम लोगों से ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने तथा वहां के अनुभवों से सीख लेने की अपील की।

जन भवन को जनता से जोड़ने की पहल

राज्यपाल ने कहा कि जन भवन जनता के लिए है और यहां किए जा रहे नवाचारों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने बच्चों और आम नागरिकों के शैक्षिक एवं जानकारीपरक भ्रमण को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने जन भवन के इतिहास और यहां किए गए विभिन्न कार्यों से विद्यार्थियों को परिचित कराने तथा उन्हें इन विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

बच्चों को कौशल आधारित अवसर देने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि समाज में कई ऐसे लोग हैं, जो विभिन्न कौशल सिखाने के लिए तैयार रहते हैं। जरूरत है कि ऐसे विशेषज्ञों और सीखने के इच्छुक बच्चों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार उन्हें प्रशिक्षण एवं आवश्यक संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया।

 

Exit mobile version