उत्तर प्रदेश के महत्त्वाकांक्षी जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है। इसके साथ ही अब एयरपोर्ट पर विमान संचालन का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही यहां से उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है। एयरोड्रम लाइसेंस यह प्रमाणित करता है कि एयरपोर्ट सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और संचालन से जुड़े सभी मानकों को पूरा करता है। यह लाइसेंस मिलने के बाद अब एयरपोर्ट से विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ की अनुमति मिल जाती है।
BCAS से पहले ही मिल चुकी है सुरक्षा मंजूरी
इससे पहले एयरपोर्ट को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से भी सुरक्षा जांच की मंजूरी मिल चुकी है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद अब DGCA ने एयरपोर्ट संचालक वाईआईएपीएल (YIAPL) को एयरोड्रम लाइसेंस जारी कर दिया है।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता
नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार एयरपोर्ट के पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ संचालन शुरू किया जाएगा। इस चरण में एयरपोर्ट सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। परियोजना के सभी चरण पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट की क्षमता बढ़कर सालाना लगभग 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी।
फिलहाल छह महीने के लिए जारी हुआ लाइसेंस
DGCA द्वारा जारी किया गया एयरोड्रम लाइसेंस फिलहाल छह महीने के लिए वैध रहेगा। इस दौरान एयरपोर्ट संचालन की सभी प्रक्रियाओं का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद इसे नियमित रूप से बढ़ाया जा सकता है।
जल्द होगा एयरपोर्ट का उद्घाटन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि एयरपोर्ट जल्द ही संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह के अनुसार अगले लगभग डेढ़ महीने के भीतर उड़ान संचालन शुरू होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धता के अनुसार जल्द ही एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।
एशिया के बड़े हवाई अड्डों में होगा शामिल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया है। पहले चरण में रनवे, टैक्सीवे, टर्मिनल भवन और पार्किंग सहित कई बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरा हो चुका है। बैगेज हैंडलिंग, बोर्डिंग, सिक्योरिटी स्क्रीनिंग और यात्री प्रबंधन से जुड़े तकनीकी परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। शुरुआत में यहां से घरेलू उड़ानें और कार्गो सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू होंगी।
पूरी तरह विकसित होने के बाद यह एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल होगा और इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

